चीनी के लिए तरसेगी दुनिया! एल नीनो और इथेनॉल के कारण भारत के निर्यात पर लंबे समय तक ब्रेक
भारत अगले 2-3 साल तक वैश्विक चीनी बाजार से बाहर रह सकता है, जिससे दुनिया भर में चीनी की सप्लाई ...और पढ़ें

चीनी के लिए तरसेगी दुनिया!
HighLights
भारत 2-3 साल तक चीनी निर्यात से बाहर।
एल नीनो और इथेनॉल मांग से उत्पादन प्रभावित।
घरेलू खपत से कम उत्पादन, आयात की नौबत।
नई दिल्ली: दुनिया के चीनी बाजार में बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि भारत आने वाले कई सालों तक निर्यात से लगभग बाहर रह सकता है। वैश्विक स्तर पर चीनी की सप्लाई पर दबाव बढ़ने के संकेत हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह बन रहे हैं एल नीनो का असर और इथेनॉल की बढ़ती मांग।
भारत से चीनी गायब, ग्लोबल सप्लाई पर असर
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जो कभी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक था, अगले कम से कम 2-3 साल तक वैश्विक बाजार में बड़ी भूमिका नहीं निभा पाएगा।
दरअसल, देश में चीनी का सरप्लस तेजी से घट रहा है। जहां पहले भारत हर साल औसतन 6.8 मिलियन टन चीनी निर्यात करता था, वहीं अब यह घटकर करीब 8 लाख टन तक सीमित रह गया है।
एल नीनो ने बिगाड़ी फसल की तस्वीर
इस बार एल नीनो के कारण कमजोर मानसून का खतरा बना हुआ है, जिससे गन्ने की खेती पर सीधा असर पड़ रहा है। बारिश कम होने से न सिर्फ बुवाई प्रभावित हो रही है बल्कि उत्पादन में भी गिरावट की आशंका है। मौसम विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि एल नीनो भारत जैसे देशों में कृषि उत्पादन को कमजोर कर सकता है, जिससे खाद्य महंगाई और सप्लाई संकट दोनों बढ़ सकते हैं।
इथेनॉल मिशन ने भी घटाई चीनी
दूसरी बड़ी वजह है भारत का तेजी से बढ़ता इथेनॉल प्रोग्राम। सरकार पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने पर जोर दे रही है, जिसके चलते गन्ने का बड़ा हिस्सा अब चीनी की बजाय ईंधन बनाने में इस्तेमाल हो रहा है। यानी जो गन्ना पहले चीनी बनता था, अब वही इथेनॉल में जा रहा है और यही बदलाव सप्लाई को और टाइट कर रहा है।
मांग ज्यादा, उत्पादन कम
अनुमानों के मुताबिक, भारत का चीनी उत्पादन करीब 27.9 मिलियन टन रह सकता है, जबकि घरेलू खपत 28.5 मिलियन टन के आसपास है। इसका मतलब साफ है देश में ही मांग ज्यादा और उत्पादन कम रहेगा, जिससे स्टॉक घटकर ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच सकता है।
आगे क्या? आयात की नौबत भी आ सकती है
अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो भारत को 2027-28 तक चीनी आयात करनी पड़ सकती है जो पिछले एक दशक में पहली बार होगा। सरकार पहले ही घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए 2026 तक चीनी निर्यात पर रोक लगा चुकी है।
ग्लोबल बाजार में बढ़ेगा दबाव
भारत के पीछे हटने से एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट जैसे आयातक देशों पर सीधा असर पड़ेगा। सप्लाई कम होगी और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल आ सकता है। एल नीनो का मौसमीय संकट और इथेनॉल की रणनीति मिलकर चीनी बाजार की पूरी तस्वीर बदल रहे हैं। भारत का निर्यात रुकना सिर्फ घरेलू फैसला नहीं, बल्कि वैश्विक चीनी संकट की शुरुआत का संकेत भी हो सकता है।
