भारत की GDP 7.8% बढ़ी, पीएम मोदी बोले- निराशावादी गलत साबित हुए; चुनौतियों के बावजूद अनुमान छूटे पीछे
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की, जो अर्थशास्त्रियों के ...और पढ़ें

भारत की जीडीपी ने 7.8% की शानदार वृद्धि दर्ज की, पीएम मोदी ने कहा- निराशावादी गलत साबित हुए
HighLights
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% जीडीपी वृद्धि।
अर्थशास्त्रियों के 7.1% अनुमान को पीछे छोड़ा, मजबूत घरेलू मांग।
भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी।
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत बढ़ी, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमान से कहीं ज्यादा है। घरेलू गतिविधियों में तेजी के कारण भू-राजनीतिक और बाहरी दबावों के बावजूद विकास दर मजबूत बनी रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) सालाना आधार पर 7.8 प्रतिशत बढ़ी।
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में स्थिर कीमतों पर वास्तविक GDP का अनुमान 81.36 लाख करोड़ रुपये लगाया गया, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह 75.46 लाख करोड़ रुपये था। नॉमिनल GDP 10.3 प्रतिशत बढ़कर 88.27 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 80 लाख करोड़ रुपये थी।
तिमाही विकास दर के आंकड़े उम्मीद से कहीं बेहतर रहे। रॉयटर्स के 58 अर्थशास्त्रियों के एक सर्वेक्षण में अप्रैल-जून तिमाही के लिए GDP विकास दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।
उम्मीद से बेहतर ये आंकड़े बताते हैं कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत में भारत की विकास की गति मजबूत बनी रही, भले ही अर्थव्यवस्था को अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, व्यापार को लेकर अनिश्चितता और वित्तीय बाज़ार में उतार-चढ़ाव जैसे मुश्किल बाहरी हालात का सामना करना पड़ा।
पीएम मोदी ने GDP ग्रोथ पर सोशल मीडिया पोस्ट पर क्या कहा?
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8% की शानदार GDP ग्रोथ एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर कहा कि, 'हमारे लोगों की सामूहिक ताकत ने यह सुनिश्चित किया कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों के बावजूद भारत ने ऐसी ग्रोथ हासिल की।' निराशावादी गलत साबित हुए और भारत ने एक बार फिर कामयाबी की नई ऊंचाई छुई।
India’s exemplary GDP growth of 7.8% during Q1 of FY 2026-27 is a herculean feat.
— Narendra Modi (@narendramodi) August 31, 2026
The collective strength of our people ensured India delivered such growth despite oil price shocks and supply chain issues in the midst of global uncertainties.
Doomsayers were doomed and India…
GVA में 8.2% की बढ़ोतरी
ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। बेसिक कीमतों पर रियल GVA, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1) में 8.2% बढ़कर ₹73.82 लाख करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹68.21 लाख करोड़ था। नॉमिनल GVA 11.5% बढ़कर ₹80.53 लाख करोड़ हो गया।
नए आंकड़े बताते हैं कि घरेलू अर्थव्यवस्था में गतिविधियां उम्मीद से ज़्यादा मजबूत रहीं, जबकि चिंताएं थीं कि ऊर्जा की ज़्यादा लागत और जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) उथल-पुथल से उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
आंकड़े जारी होने से पहले, अर्थशास्त्रियों ने उपभोक्ता मांग, सरकारी पूंजीगत खर्च, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों और निर्यात को अर्थव्यवस्था के लिए मुख्य आधार बताया था।
नई GDP सीरीज
पहली तिमाही के आंकड़े इसलिए भी अहम हैं क्योंकि ये भारत की नई नेशनल अकाउंट्स सीरीज़ के तहत हैं, जिसमें 2022-23 को बेस ईयर (आधार वर्ष) माना गया है।
MoSPI ने फरवरी 2026 में नई सालाना और तिमाही GDP सीरीज़ जारी की थी। अपडेटेड अनुमानों में संशोधित डेटा और तरीके शामिल हैं, जैसे कि नया प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, संशोधित इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और एडमिनिस्ट्रेटिव डेटासेट शामिल हैं।
बाहरी जोखिमों के बावजूद ग्रोथ बरकरार
अर्थव्यवस्था की यह मजबूती भारत के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय में दिखी है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के कारण ग्लोबल ऑयल की कीमतों में तेज़ी आई है, जबकि रुपया दबाव में रहा है। सोमवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने विदेशी मुद्रा बाजार में दखल दिया, क्योंकि ब्रेंट क्रूड की कीमत $90 प्रति बैरल से ऊपर चली गई और US फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें बढ़ गईं।
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सोमवार को भारतीय शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा गिरा और निफ्टी 24,100 से नीचे बंद हुआ, क्योंकि निवेशक क्रूड की कीमतों, ग्लोबल ब्याज दरों और जियोपॉलिटिकल जोखिमों को लेकर चिंतित थे।
