ट्रंप के ईरान युद्ध रुकवाने से पहले भारत ने निर्यात में कर दिया कमाल, 45.2 अरब डॉलर के साथ बनाया रिकॉर्ड
मई में भारत का निर्यात 18% बढ़कर 45.2 अरब डॉलर के छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि ...और पढ़ें

मई में दक्षिण अफ्रीका में होने वाले निर्यात में तो 116 प्रतिशत तो तंजानिया में 196 प्रतिशत का इजाफा रहा।
HighLights
मई में निर्यात 45.2 अरब डॉलर के छह माह के उच्च स्तर पर।
कच्चे तेल के आयात से व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर बढ़ा।
इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात के प्रमुख क्षेत्र रहे।
राजीव कुमार, जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट व अन्य वैश्विक अस्थिरता के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2026-27 में निर्यात में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। सोमवार को वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक मई में वस्तु निर्यात में पिछले साल मई के मुकाबले 18 प्रतिशत का इजाफा रहा। इस साल अप्रैल में वस्तु निर्यात में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। मई में 45.20 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात रहा जो किसी माह में होने वाला अब तक का सर्वाधिक निर्यात है। हालांकि मई में 73.41 अरब डॉलर का आयात भी किया गया, इसलिए व्यापार घाटा भी 28 अरब डॉलर का रहा।
इन आइटम का हुआ सबसे ज्यादा निर्यात
मई में मुख्य रूप से पेट्रोलियम, इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रानिक्स गुड्स, फार्मा, केमिकल्स, जेम्स व ज्वैलरी जैसे आइटम के बेहतर निर्यात प्रदर्शन से कुल निर्यात का अच्छा प्रदर्शन रहा। अब पश्चिम एशिया देशों में होने वाले निर्यात में भी गत मार्च व अप्रैल के मुकाबले बढ़ोतरी दिख रही है। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, वियतनाम जैसे देश निर्यात के नए बाजार के रूप में उभर रहे हैं।
तंजानिया में 196 प्रतिशत का इजाफा
मई में दक्षिण अफ्रीका में होने वाले निर्यात में तो 116 प्रतिशत तो तंजानिया में 196 प्रतिशत का इजाफा रहा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि ईरान व अमेरिका के बीच युद्ध को लेकर होने वाला डील टिकाऊ रहा तो इससे हमारी कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा। पश्चिम एशिया के देशों में अप्रैल में 4.2 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था। मई में यह निर्यात बढ़कर 5.3 अरब डॉलर का हो गया। सऊदी अरब होने वाले निर्यात में पिछले साल मई के मुकाबले 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही।
निर्यात में कितनी हुई बढ़ोतरी
| क्रमांक | वस्तु | प्रतिशत बढ़ोतरी |
|---|---|---|
| 1 | पेट्रोलियम उत्पाद | 54.89% |
| 2 | मांस व डेयरी उत्पाद | 42.51% |
| 3 | इंजीनियरिंग गुड्स | 24.48% |
| 4 | प्लास्टिक | 18.00% |
| 5 | केमिकल्स | 12.71% |
| 6 | इलेक्ट्रानिक्स | 11.62% |
| 7 | जेम्स व ज्वैलरी | 6.66% |
आयात (Imports) में बदलाव
| क्रमांक | वस्तु | प्रतिशत बदलाव |
|---|---|---|
| 1 | पेट्रोलियम व कच्चा तेल | +53.80% |
| 2 | इलेक्ट्रानिक्स गुड्स | +35.49% |
| 3 | सोना | +33.97% |
| 4 | वनस्पति तेल | +32.26% |
| 5 | दाल | +27.52% |
| 6 | चांदी | -86.65% |
सोने के आयात में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी
पश्चिम एशिया संकट के बीच सोने के आयात को रोकने के उपायों का असर नहीं दिख रहा है। गत 10 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से सोने की खरीदारी एक साल के लिए टालने की अपील की थी। सोने के आयात शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया। फिर भी गत मई माह में सोने के आयात में कमी नहीं आई, उल्टा सोने का आयात पिछले साल मई के मुकाबले 34 प्रतिशत बढ़ गया।
इस साल मई में सोने का आयात 3.4 अरब डॉलर का रहा जबकि पिछले साल मई में यह आयात 2.5 अरब डॉलर का था। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों अप्रैल व मई को मिलाकर सोने के आयात में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 66 प्रतिशत का इजाफा रहा। इस साल अप्रैल-मई में सोने का आयात नौ अरब डॉलर का रहा जबकि पिछले साल इस अवधि में 5.6 अरब डॉलर का आयात किया गया था।
पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित होने लगा और कुल आयात में कमी लाने के उद्देश्य से ही प्रधानमंत्री ने लोगों से सोने की खरीदारी को टालने की अपील की थी। ताकि विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाया जा सके। वित्त मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का भी मानना है कि भारत में सोना आम लोगों की भावना से जुड़ा है और एक सीमा से अधिक सरकार को इसकी खरीदारी को हतोत्साहित करने का उपाय नहीं कर सकती है।
