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भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में दी चीन को पटखनी! निर्यात का आंकड़ा पहुंचा ₹424000000000, इस सरकारी योजना का दिखा असर

Published: Tue, 22 Sep 2026 05:33 PM (IST)

भारत और चीन के व्यापार समीकरण में बदलाव आया है, जहां अगस्त तक भारत का चीन को निर्यात 40% बढ़ा ...और पढ़ें

भारत का चीन को निर्यात 40 फीसदी बढ़ा (AI Image)

भारत का चीन को निर्यात 40 फीसदी बढ़ा (AI Image)

HighLights

  1. भारत का चीन को निर्यात अगस्त तक 40% बढ़ा।

  2. PCBA निर्यात 40 गुना बढ़कर 1.5 अरब डॉलर हुआ।

  3. सरकारी योजनाओं से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात में वृद्धि।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापार समीकरण में बड़ बदलाव देखने को मिला है। आमतौर पर दोनों देशों के बीच ट्रेड में चीन का भारत को निर्यात हमेशा आयात से अधिक रहा है, उसमें अचानक एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त तक के पांच महीनों में चीन को भारत का निर्यात लगभग 40% बढ़ गया है। इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग गुड्स का रहा, जो ट्रेडिशनल रूप से चीन के भारत को होने वाले प्रमुख निर्यात उत्पाद रहे हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह उछाल लो बेस से आया है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर बनने से बढ़ी हुई मांग के कारण हुआ है। फिर भी, यह बदलाव भारत-चीन व्यापार संबंधों में उभर रहे एक दीर्घकालिक रुझान का संकेत हो सकता है।

चीन संभवतः भारत से कुछ चुनिंदा इंटरमीडिएट इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की खरीद शुरू कर रहा है, जबकि उसके अपने मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन अधिक ए़़डवांस और कॉम्पलेक्स हिस्सों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इससे निर्यात के इन आंकड़ों का महत्व केवल अस्थायी मांग वृद्धि से कहीं अधिक हो जाता है।

PCBA निर्यात में चीन बना सबसे बड़ा खरीदार

फाइनेंशियल ईयल 2026-27 (FY27) के पहले पांच महीनों में चीन को भारत के कुल निर्यात में लगभग 40% बढ़ोतरी से पहले भी एक अन्य आंकड़ा इस बदलाव की ओर संकेत दे चुका था। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत का PCBA (Printed Circuit Board Assembly) निर्यात चीन को 40 गुना से अधिक बढ़कर 1.5 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक 1 पहले केवल 3.6 करोड़ डॉलर था। भारत के कुल PCBA निर्यात का लगभग 80% हिस्सा चीन गया। वहीं भारत का कुल PCBA निर्यात 20 गुना से अधिक बढ़कर 1.9 अरब डॉलर हो गया।

ये आंकड़े बताते हैं कि चीनी निर्माता तेजी से भारत से अपेक्षाकृत सरल इलेक्ट्रॉनिक असेंबली खरीद रहे हैं, जबकि वे अपने देश में अधिक वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों की ओर बढ़ रहे हैं।

चीन बढ़ा रहा इंपोर्ट

दशकों तक सामान्य स्थिति यह रही कि भारत चीन से पुर्जे आयात करता था और उनका उपयोग भारतीय बाजार या अन्य देशों को निर्यात के लिए उत्पाद तैयार करने में करता था। इसके उलट भारत में निर्मित इलेक्ट्रॉनिक असेंबली का फ्लो यह संकेत देता है कि इस संबंध का एक हिस्सा बदल रहा है। चीन की शुरुआती बढ़त सस्ते सामान बनाने की क्षमता पर आधारित थी। लेकिन अब उसने सप्लायर्स का इतना बड़ा नेटवर्क विकसित कर लिया है कि निर्माता उत्पादन को अधिक स्पेशिफिक और अलग-अलग फेजेस में बांट सकते हैं।

जैसे-जैसे चीनी कंपनियां सेमीकंडक्टर, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स, AI सर्वर, टेलिकम्युनिकेशंस एक्युप्मेंट्स और अन्य वैल्यू एडेड सेक्टर में आगे बढ़ रही हैं, उनके लिए हर अपेक्षाकृत साधारण सब-असेंबली का प्रोडक्शन खुद करना जरूरी नहीं रह जाता।

भारत की भूमिक क्यों है महत्वपूर्ण?

भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। भारत ने हाल के सालों में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का बड़ा विस्तार किया है, लेकिन उसका इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) उद्योग अभी भी मुख्य रूप से कम वैल्यू वाली एक्टिविटीज जैसे PCBA और बेसिक बॉक्स-बिल्ड मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित है। डिजाइन-आधारित मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी गतिविधियां अभी शुरुआती चरण में हैं।

भारत को एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चीन को रिप्लेस करने की जरूरत नहीं है। उसे केवल कुछ चुनिंदा इंटरमीडिएट प्रोडक्शन फेजेस में कॉम्पटेटिव बनना है।

इस सरकारी योजना का दिखा फायदा

जहां एक ओर चीन का वैल्यू चेन में ऊपर जाना इस कहानी का हिस्सा है, वहीं दूसरी ओर भारत के भीतर भी बदलाव हो रहा है। देश अब अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स रणनीति के पहले चरण से आगे बढ़ रहा है, जो मुख्य रूप से तैयार स्मार्टफोन की असेंबली पर केंद्रित था। अब गवर्नमेंट पॉलिसी स्पष्ट रूप से कंपोनेंट्स, सब-असेंबली, कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग इक्यूपमेंट्स पर ध्यान दे रही है।

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इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम इसमें विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सरकार ने इस योजना का आवंटन ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया है। अगस्त तक ₹69,548 करोड़ के निवेश वाले 106 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी थी, जिनमें से 38 प्लांट्स चालू हो चुके हैं या निर्माण के एडवांस फेजेस में हैं। इस योजना का घोषित उद्देश्य केवल आयातित पुर्जों की असेंबली करने के बजाय कंपोनेंट्स और कच्चे माल में घरेलू क्षमता विकसित करना है।

प्रोडक्शन और निर्यात में भारी बढ़ोतरी

इस बदलाव के संकेत पहले से दिखाई देने लगे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ हो गया। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ पहुंच गया।

घरेलू वैल्यू एडिशन भी बढ़ा है, हालांकि यह अभी लगभग 18-20% के लेवल पर है। भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात कहानी अभी भी आयातित इनपुट पर काफी निर्भर है।