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रिकॉर्ड निचले स्तरों पर '₹', क्यों आई गिरावट; क्या 100/$ तक जा सकता है रुपया?

Published: Mon, 11 May 2026 11:53 AM (IST)

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95.17 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है, जिसकी मुख्य वजह कच्चे तेल ...और पढ़ें

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HighLights

  1. रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.17 के निचले स्तर पर

  2. कच्चे तेल की कीमतें, मध्य पूर्व तनाव गिरावट के कारण

  3. 2026 के अंत तक रुपया 100 प्रति डॉलर तक पहुंचने की संभावना- एक्सपर्ट

नई दिल्ली। शेयर बाजार में गिरावट के बीच भारतीय रुपये (Rupee Weakness) भी कमजोरी देखने को मिल रही है। अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले रुपया, तेजी से कमजोर होकर 95.17 रुपये पर आ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली के चलते यह 2026 के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। दरअसल, रुपये में यह गिरावट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, गैर-जरूरी विदेश यात्रा से बचने और एक साल के लिए सोने की गैर-जरूरी खरीदारी टालने की अपली के बाद आई है। पीएम मोदी ने चेतावनी दी थी कि वैश्विक कमोडिटी की बढ़ती कीमतों से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर नया दबाव पड़ सकता है।

पीएम मोदी ने रविवार को हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का सामना करने के लिए "राष्ट्रीय रूप से जिम्मेदार" जीवनशैली के विकल्प अपनाने होंगे। इसके अलावा, भारतीय रुपये में कमजोरी के अन्य बड़े कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव और शेयर बाजार में गिरावट है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते सप्लाई में व्यवधान की आशंकाओं के मद्देनजर, ब्रेंट क्रूड की कीमत वायदा कारोबार में 4.17% बढ़कर 105.5 डॉलर प्रति बैरल हो गई। भारत, अपनी जरुरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर आयात बिल में वृद्धि और डॉलर की मजबूत मांग को दर्शाती हैं, जिससे रुपये पर दबाव पड़ता है।

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, LKP सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी का कहना है है कि अगर मौजूदा वैश्विक हालात लंबे समय तक बने रहे तो 2026 के अंत तक रुपया 100 प्रति डॉलर तक पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

US ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कथित तौर पर वाशिंगटन के शांति प्रस्ताव पर ईरान की नवीनतम प्रतिक्रिया को अस्वीकार करने के बाद वैश्विक बाजारों में नई अस्थिरता आ गई है, जिससे पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

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घरेलू शेयर बाजारों पर भी भारी दबाव पड़ा, जिससे रुपये की कमजोरी और बढ़ गई। सुबह 10:35 बजे तक सेंसेक्स 1,071.65 अंक या 1.39% गिरकर 76,256.54 पर आ गया, जबकि निफ्टी 305 अंक या 1.26% गिरकर 23,871.15 पर आ गया।

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