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Indian Army के रसद में पहुंचेगा ‘भारत राइस!’ ऑपरेशन सिंदूर से सबक लेकर FCI के साथ बना मास्टर प्लान, लड़ाई के लिए पहले से भी मजबूत तैयारी

Published: Tue, 13 Oct 2026 12:17 PM (IST)Updated: Tue, 13 Oct 2026 01:29 PM (IST)

भारतीय सेना ने रक्षा कर्मियों के लिए 'भारत राइस' पहल शुरू की है, जिसके तहत FCI के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया गया है।

सेना के सप्लाई डिपो तक पहुंचेगा भारत राइस

सेना के सप्लाई डिपो तक पहुंचेगा भारत राइस

HighLights

  1. सेना ने रक्षा कर्मियों के लिए 'भारत राइस' पहल शुरू की है।

  2. FCI संग MoU से सैन्य रसद और आपूर्ति मजबूत होगी।

  3. लद्दाख, पूर्वोत्तर सहित दूरदराज के इलाकों तक चावल पहुंचेगा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सेना ने रक्षा कर्मियों के लिए ‘भारत राइस’ पहल की शुरुआत की है। इसके साथ ही सेना ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया। इसके तहत जरूरत पड़ने पर सेना FCI के गोदामों, कर्मचारियों और सामान की ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले इक्विपमेंट की मदद ले सकेगी। इस पहल का उद्देश्य सेना के राशन की क्वालिटी सुधारना और दूरदराज के इलाकों में जवानों तक जरूरी सामान की समय पर सप्लाई पूरी करना है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इस पहल की शुरुआत की। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस व्यवस्था से सैन्य रसद यानी जवानों तक राशन और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत होगी। खासकर उन परिस्थितियों में इसका फायदा मिलेगा, जब सेना को कम समय में बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती करनी हो और अग्रिम मोर्चों तक लगातार आपूर्ति बनाए रखनी हो।

लद्दाख और पूर्वोत्तर के दूरदराज इलाकों तक पहुंचेगा चावल

नई व्यवस्था के तहत सेना के निर्धारित मानकों के अनुरूप चावल सीधे सेना के सप्लाई डिपो तक पहुंचाया जाएगा। इसमें लद्दाख और पूर्वोत्तर के दूरदराज के इलाकों में स्थित डिपो भी शामिल हैं। अभी डिपो को स्थानीय FCI केंद्रों से राशन लेने के लिए व्यवस्था करनी पड़ती है, लेकिन नई पहल से चावल की सीधी आपूर्ति होने पर ट्रांस्पोर्ट और वितरण आसान होने की उम्मीद है।

चावल की सप्लाई वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) के माध्यम से की जाएगी। चावल की बेहतर क्वालिटी बनाए रखने के लिए जांच की जाएगी। इसे 10 किलो और 30 किलो के बैग में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि कठिन ज्योग्राफिकल कंडीशन में भी इसकी ढुलाई और रखरखाव आसानी से किया जा सके।

चावल की बेहतर पैकेजिंग पर जोर

कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह पहल ‘जय जवान, जय किसान’ की भावना को दर्शाती है। इसके माध्यम से किसानों की मेहनत को सैनिकों के कल्याण और सेना केस ऑपरेशनल संबंधी तैयारियों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि चावल की पैकेजिंग इस तरह की जाएगी, जिससे कठिन इलाकों में इसका परिवहन आसान हो सके।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में रसद व्यवस्था भी लड़ने की क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हथियारों और तकनीक के साथ-साथ सप्लाई चेन, स्टोरेज क्षमता, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और समय पर राशन की भरपाई भी बेहद जरूरी है।

ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक का भी जिक्र

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य के संघर्षों में चेतावनी मिलने और कार्रवाई शुरू होने के बीच बहुत कम समय हो सकता है। ऐसे हालात में सेना की सप्लाई चेन और सामान पहुंचाने की व्यवस्था की मजबूती की परीक्षा होगी। उन्होंने FCI के साथ हुए समझौते को सेना की ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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समझौते के तहत FCI के देशभर में मौजूद गोदामों, माडर्न साइलो, सामान की ढुलाई और रखरखाव के उपकरणों तथा ट्रेंड कर्मचारियों की मदद ली जा सकेगी। इससे राशन और अन्य जरूरी सामान को सैन्य अभियानों वाले क्षेत्रों के नजदीक रखने और वहां तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी।

यह समझौता पांच साल तक प्रभावी रहेगा। दोनों पक्षों की आपसी सहमति से इसकी अवधि आगे बढ़ाई जा सकती है। इस पहल को अंतिम रूप देने के लिए सेना, FCI, NAFED और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के बीच करीब 18 महीने तक कॉर्डिनेशन किया गया।