बांग्लादेश ने की भारत से एंटी डंपिंग ड्यूटी हटाने की मांग, कारोबार को आसान करना चाहता है पड़ोसी! क्या है भारत का स्टैंड?
भारत और बांग्लादेश ने व्यापारिक बाधाएं दूर करने और सीमा पार आवाजाही बेहतर बनाने के लिए नई दिल्ली में बातचीत ...और पढ़ें

भारत-बांग्लादेश के बीच व्यापार वार्ता
HighLights
भारत ने ऊंचे आयात शुल्क, कपास प्रतिबंध का मुद्दा उठाया।
बांग्लादेश ने एंटी-डंपिंग शुल्क हटाने, बाजार पहुंच मांगी।
दोनों देशों ने व्यापारिक बाधाएं दूर करने पर सहमति जताई।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों के तहत 8 और 9 अक्टूबर को नई दिल्ली में व्यापार संबंधी बातचीत हुई। इस दौरान भारत ने बांग्लादेश की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए ऊंचे इंपोर्ट ड्यूटी, कपास के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध और पूर्वोत्तर राज्यों के साथ व्यापार के नियमों का मुद्दा उठाया। वहीं, बांग्लादेश ने भारत से अपने उत्पादों की पहुंच आसान बनाने, जूट उत्पादों और PET फिल्म पर एंटी-डंपिंग शुल्क हटाने और सीमा पर माल की आवाजाही बेहतर करने की मांग की।
दोनों देशों के बीच ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप की यह बैठक लंबे अंतराल के बाद हुई है। दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस व्यापार वार्ता को पॉजिटिव बताया गया है। इससे दोनों देशों के वाणिज्य सचिवों के बीच प्रस्तावित बैठक की तैयारी में मदद मिलने की उम्मीद है।
पूर्वोत्तर राज्यों में व्यापार के नियम बदलने की भारत की मांग
बातचीत के दौरान भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में भारतीय कपास के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों का मुद्दा उठाया। इसके अलावा, भारतीय फल, चावल, लोहा और इस्पात जैसे उत्पादों पर लगाए गए ऊंचे आयात शुल्क पर भी चिंता जताई गई। भारत ने पूर्वोत्तर राज्यों के साथ भूमि सीमा चौकियों के जरिए होने वाले व्यापार में बांग्लादेश की ओर से लागू पॉजिटिव लिस्ट व्यवस्था को भी मुद्दा बनाया।
इसके उलट, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के साथ बांग्लादेश का व्यापार नेगेटिव लिस्ट के आधार पर होता है। इसमें कुछ प्रतिबंधित वस्तुओं को छोड़कर अन्य उत्पादों के व्यापार की अनुमति होती है। भारत लंबे समय से पूर्वोत्तर राज्यों के साथ भी नेगेटिव लिस्ट व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहा है, ताकि दोनों पक्षों के कारोबारियों को समान अवसर मिल सकें।
भारत ने अंतरिम सरकार के कार्यकाल में बंद किए गए सीमा हाट यानी सीमावर्ती बाजारों, इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और लैंड कस्टम्स पोस्ट को दोबारा शुरू करने का मुद्दा भी उठाया।
एंटी-डंपिंग शुल्क हटाने की मांग
बांग्लादेश ने भारतीय भूमि बंदरगाहों के जरिए अपने उत्पादों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंधों का रिव्यू करने की मांग की। उसने जूट उत्पादों और पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) फिल्म पर लागू एंटी-डंपिंग शुल्क हटाने का मुद्दा भी उठाया।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी किसी दूसरे देश से आयात होने वाले उत्पादों पर तब लगाया जा सकता है, जब वे निर्धारित सामान्य मूल्य से कम कीमत पर बेचे जा रहे हों और घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचने की स्थिति हो।
बांग्लादेश ने भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के तहत उत्पाद मानकों में तालमेल बैठाने और सर्टिफिकेटेशन प्रक्रिया आसान करने की भी मांग की। इससे उसके कारोबारियों को भारतीय बाजार में उत्पाद बेचने के दौरान होने वाली प्रक्रियागत दिक्कतों और देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, बांग्लादेश ने सबसे कम विकसित देशों (LDC) की कैटेगरी से बाहर निकलने के बाद भी अपने उत्पादों के लिए मौजूदा टैरिफ प्राथमिकताएं बनाए रखने का अनुरोध किया।
नेपाल-भूटान तक ट्रकों की इंट्री आसान करने की मांग
बातचीत में में माल ढुलाई और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी प्रमुख मुद्दे रहे। बांग्लादेश ने भारत के रास्ते नेपाल और भूटान जाने वाले अपने ट्रकों को अधिक पहुंच देने की मांग की। उसने भारतीय भूमि सीमा शुल्क चौकियों पर बुनियादी ढांचा बेहतर करने की जरूरत बताई। इसमें संपर्क सड़कों, गोदामों और क्वारंटीन सुविधाओं का विकास शामिल है। इसके साथ ही बांग्लादेश ने भूमि बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने और माल की कस्टम क्लीयरेंस प्रक्रिया तेज करने की मांग की। इन सुविधाओं में सुधार से सीमा पर मालवाहक वाहनों की वेटिंग पीरियड घटाने और परिवहन लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
12.36 अरब डॉलर का रहा दोनों देशों का व्यापार
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय व्यापार 12.36 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 10.58 अरब डॉलर था। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच व्यापार में भारत का निर्यात बड़ा हिस्सा रखता है। वार्ता से जुड़े मीडिया सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा व्यापार घाटे को देखते हुए बांग्लादेश की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों में जल्द ढील दिए जाने की संभावना कम है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत का जोर व्यापारिक बाधाओं को दूर करने, सीमा पर बुनियादी ढांचा बेहतर करने और माल की आवाजाही आसान बनाने पर है। आने वाले समय में वाणिज्य सचिवों की प्रस्तावित बैठक और आगे होने वाली बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश आयात शुल्क, निर्यात प्रतिबंध और सीमा पार व्यापार से जुड़े मुद्दों पर किस हद तक सहमति बना पाते हैं।
