विदेशों पर अब नहीं निर्भर होगा भारत, घर में खुद बनाएगा 120 प्रोडक्ट्स; बढ़ेगी देश की ताकत
भारत सरकार ने विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता कम करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 120 उत्पादों की ...और पढ़ें

बढ़ेगी देश की ताकत
HighLights
सरकार ने 120 उत्पादों की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई।
विदेशी सप्लायर्स, खासकर चीन पर निर्भरता होगी कम।
टनल बोरिंग मशीनों का उत्पादन भी देश में होगा।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: भारत को विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता से मुक्त करने और देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने करीब 120 ऐसे प्रोडक्ट्स की पहचान की है, जिन्हें देश में ही बनाने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। इस पहल का मकसद जरूरी औद्योगिक सामान के आयात पर निर्भरता घटाना, घरेलू कंपनियों को बढ़ावा देना और सप्लाई चेन को मजबूत बनाना है। खास बात यह है कि सरकार टनल बोरिंग मशीनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रही है। चीन की ओर से इन मशीनों की सप्लाई पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद यह कदम अहम हो गया है।
किन सामानों का देश में बढ़ेगा उत्पादन?
रिपोर्ट्स की मानें तो अद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) इस पूरी कवायद को आगे बढ़ा रहा है। चुने गए उत्पादों में कई तरह के औद्योगिक सामान, मशीनरी और जरूरी कच्चे माल शामिल हैं।
- केमिकल्स: एसिटिक एसिड जैसे रसायन।
- फार्मा सेक्टर: दवाएं और दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले इनपुट।
- मेडिकल टेक्नोलॉजी: चिकित्सा उपकरणों से जुड़े उत्पाद।
- मशीनरी: मशीन टूल्स और टेक्सटाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाली कुछ मशीनें।
- कंस्ट्रक्शन सेक्टर: निर्माण उपकरण और क्रेन।
- एयरोस्पेस: विमानों के रखरखाव, मरम्मत और संचालन यानी MRO से जुड़े उत्पाद।
- फुटवियर: जूते-चप्पल बनाने की पूरी सप्लाई चेन से जुड़े कुछ सामान।
- टनल बोरिंग मशीनें: सुरंग बनाने में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मशीनों के घरेलू उत्पादन की अलग योजना।
कंपनियों को राहत देने के लिए क्या करेगी सरकार?
सरकार केवल उत्पादों की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि घरेलू कंपनियों को विदेशी कंपनियों से मुकाबला करने में मदद देने के लिए तीन तरह के उपायों पर विचार कर रही है।
1. विदेशी सामान से मुकाबले के लिए शुरुआती सुरक्षा: कुछ चुने हुए उत्पादों को विदेशी सप्लायर्स, खासकर चीन से आने वाले सामान की प्रतिस्पर्धा से अस्थायी सुरक्षा देने पर विचार है। इसका उद्देश्य भारतीय कंपनियों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और दूसरे सप्लायर्स तैयार करने का समय देना है।
2. उत्पादन की लागत घटाने के लिए प्रोत्साहन: जिन उत्पादों को भारत में बनाना महंगा पड़ता है, उनके लिए पूंजीगत प्रोत्साहन या चरणबद्ध तरीके से मिलने वाली वित्तीय सहायता पर विचार किया जा रहा है। कुछ मामलों में सहायता को कंपनी के कारोबार से भी जोड़ा जा सकता है।
3. रिसर्च और डेवलपमेंट में मदद: कुछ उत्पादों को भारत में बनाने के लिए जरूरी तकनीक अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसे मामलों में सरकार रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए सहायता देने पर विचार कर रही है।
चीने से घटेगी निर्भरता
जब भारत में इन सामानों का उत्पादन शुरू हो जाएगा तो भारत की चीन से निर्भरता घर जाएगी। वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण भारत में कई जरूरी उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान भी आयात पर निर्भरता की चुनौती सामने आई थी। कोविड महामारी के दौरान मेडिकल इनपुट की सप्लाई में आई बाधाओं ने भी इस जोखिम को उजागर किया था।
इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां, सोलर मॉड्यूल, दवाओं के एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और स्पेशियलिटी केमिकल्स जैसे उत्पादों में चीन की अहम भूमिका है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, पिछले 15 वर्षों में भारत के औद्योगिक सामान के आयात में चीन की हिस्सेदारी 21% से बढ़कर 30% हो गई है।
