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स्मार्टफोन में लहराया परचम, अब सेमीकंडक्टर का बादशाह बनेगा भारत! 2032 तक 25% मार्केट पर कब्जा करने का लक्ष्य

By राजीव कुमारEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Fri, 02 Oct 2026 07:56 PM (IST)

भारत स्मार्टफोन निर्माण में सफलता के बाद अब वैश्विक चिप बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य बना रहा है। ...और पढ़ें

भारत का लक्ष्य 2032 तक 25% वैश्विक चिप बाजार हिस्सेदारी।

भारत का लक्ष्य 2032 तक 25% वैश्विक चिप बाजार हिस्सेदारी।

HighLights

  1. भारत का लक्ष्य 2032 तक 25% वैश्विक चिप बाजार हिस्सेदारी।

  2. माइक्रोन, टाटा जैसी कंपनियाँ भारत में चिप निर्माण कर रही हैं।

  3. सेमीकॉन इंडिया 2.0 से 1.27 लाख करोड़ की वित्तीय सहायता।

राजीव कुमार, नई दिल्ली। स्मार्टफोन के बाद भारत अब दुनिया के नए ईंधन के रूप में मशहूर चिप निर्माण में अपनी वैश्विक हिस्सेदारी बढ़ाने जा रहा है। वर्ष 2032 तक चिप का वैश्विक बाजार 1.6 लाख करोड़ डालर का हो जाएगा जो दुनिया के कई देशों के जीडीपी से अधिक होगा। इस वैश्विक बाजार में भारत ने अपनी हिस्सेदारी को 25 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है।

भारत दुनिया में बनने वाले 20 प्रतिशत चिप का इस्तेमाल करता है। वर्तमान में भारत सालाना 45-50 अरब डालर के चिप की खपत करता है और इनमें से 30 अरब डालर के चिप का आयात करता है। छह साल पहले तक चिप का पूरी तरह से आयात होता था।

2021 में सेमीकान इंडिया 1.0 के शुरू होने के बाद पिछले एक साल में माइक्रोन टेक्नोलाजी, केंज सेमीकान और सीजी पावर जैसी कंपनियां भारत में चिप बनाने लगी है। भारत में चिप निर्माण की शुरुआत से इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली विशेष प्रकार की गैस व केमिकल्स उद्योग को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। 85,000 से अधिक इंजीनियर को प्रशिक्षित किया जा रहा है और अगले पांच-छह साल में चिप निर्माण से 10 लाख से अधिक रोजगार निकलने की संभावना है।

फिलहाल चिप निर्माण के लिए होने वाली डिजाइनिंग के काम में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी भारतीय इंजीनियर की है।

गुजरात से लेकर असम तक में बन रही चिप

गुजरात स्थित माइक्रोन टेक्नोलाजी मेमोरी चिप बना रही है तो केंस सेमीकान और सीजी पावर ऑटमोबाइल्स व औद्योगिक वस्तुओं में इस्तेमाल होने वाले चिप का निर्माण कर रही है। सीजी पावर रोजाना 1.5 करोड़ चिप तो केंस 63 लाख रोजाना स्तर पर चिप का निर्माण कर रही है।

गुजरात में स्थापित होने वाली टाटा इलेक्ट्रानिक्स टेलीकाम और आईटी में इस्तेमाल होने वाले चिप का निर्माण वर्ष 2028 से करने जा रही है। असम में स्थापित हो रही टाटा इलेक्ट्रानिक्स की दूसरी निर्माण यूनिट दोपहिया, कार और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होने वाले चिप का निर्माण अगले एक से दो साल में करने लगेंगी।

असम की यूनिट रोजाना 4.8 करोड़ चिप का निर्माण करेगी।सेमीकान 1.0 के तहत चिप निर्माण से जुड़ी डिजाइनिंग, फैब व पैकेजिंग यूनिट व चिप निर्माण से जुड़े अन्य आइटम के निर्माण के लिए सरकार ने 76,000 करोड़ की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी। इसकी मदद से 1.64 लाख करोड़ का निवेश किया गया।

सरकार ने की थी सेमीकान 2.0 की घोषणा

हाल ही में सरकार ने 1.27 लाख करोड़ की वित्तीय सहायता के साथ सेमीकान 2.0 की घोषणा की है ताकि एक पूरा इको-सिस्टम तैयार हो सके। गुजरात में केमिकल्स निर्माण का इको-सिस्टम पहले से मौजूद होने की वजह से ही सेमीकान बनाने वाली कंपनियां गुजरात में यूनिट लगाने में दिलचस्पी दिखा रही है। सरकार चाहती है कि रक्षा और अन्य रणनीति क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले चिप का पूरा इको-सिस्टम भारत में ही हो।

पिछले महीने नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित सेमीकान इंडिया सम्मेलन के आयोजन के दौरान टाटा इलेक्ट्रानिक्स के सीईओ रंधीर ठाकुर ने बताया कि उनकी कंपनी चिप की सप्लाई चेन से जुड़े 16 फर्म के साथ समझौता कर रही है जिसमें यूरोप, सिंगापुर, मलेशिया जैसे देशों के फर्म शामिल हैं।

लैम रिसर्च सिलिकान व कंपोनेंट्स निर्माण के लिए 10,000 करोड़ का तो फ्यूजी फिल्म सेमीकान मैटेरियल बनाने पर 800 करोड़ का निवेश करने जा रही है। टोक्यो इलेक्ट्रानिक्स सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए ट्रेंनिंग सेंटर खोलने जा रही है। इंटेल, क्वालकाम, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट व एनएक्सपी जैसी कंपनियां पहले से ही चिप डिजाइनिंग सेक्टर में भारत में काम कर रही है।

2020 में भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली गिनती की दो-चार कंपनियां थी और भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत मोबाइल फोन का आयात करता था। आज अपनी जरूरत का 99 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत स्वयं बनाता है और 30 अरब डालर से अधिक मूल्य के स्मार्टफोन का निर्यात करता है। फोन निर्माण व निर्यात दोनों में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है।

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