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भारत में इसलिए नहीं आया पेट्रोल-डीजल का संकट, मोदी सरकार ने दिखाई समझदारी, ट्रंप की इस छूट का खूब उठाया फायदा

Published: Fri, 03 Apr 2026 11:10 AM (IST)

पश्चिम एशिया में तनाव से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने पर भारत की खपत 15% घटी लेकिन मार्च में ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. भारत ने मार्च में रूस से तेल आयात 90% बढ़ाया।

  2. यह उछाल अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिन की छूट के बाद हुआ।

  3. एलपीजी आयात 40% घटा, घरेलू उत्पादन से संभाला।

नई दिल्ली। ईरान व अमेरिका में जंग (Iran-US War) और पश्चिम एशिया में जारी तनाव से कच्चे तेल (Crude Oil Supply) की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस व्यवधान के कारण देश में कच्चे तेल की खपत में लगभग 15% की गिरावट आई। इसके बावजूद, भारत ने मार्च में रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी वृद्धि दर्ज की, और फरवरी की तुलना में आयात पिछले महीने 90% तक बढ़ गया। टीओआई की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। यही वजह है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की किल्लत नहीं हुई, जबकि अन्य पड़ोसी देशों में ऊर्जा संकट गहराया है। दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच अपेक्षाकृत कम खरीदारी के बाद, रूस से क्रूड इंपोर्ट में जोरदार उछाल आया।

यह उछाल अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिन की छूट के बाद हुआ। अखबार के अनुसार, रूस के साथ-साथ भारत ने अंगोला, गैबॉन, घाना और कांगो जैसे अफ्रीकी देशों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई, हालांकि आयात बास्केट में उनकी कुल हिस्सेदारी सीमित ही रही।

LPG सप्लाई के दूसरे देशों से संपर्क

युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति काफी प्रभावित हुई। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान पेट्रोलियम गैस (LPG) आयात में 40% की गिरावट आई, जबकि एलएनजी की आपूर्ति में भी कमी आई, जिसके चलते नई दिल्ली को अन्य वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ी। एलपीजी आयात में आई भारी गिरावट को घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं को आपूर्ति सीमित करके कुछ हद तक नियंत्रित किया गया, जिससे भारत के 33 करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं के विशाल आधार के लिए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हुई।

केप्लर के एनालिस्ट सुमित रितोइया ने बताया कि मध्य पूर्वी उत्पादकों द्वारा होर्मुज को बाईपास करने वाली पाइपलाइनों के माध्यम से आपूर्ति को पुनर्निर्देशित करने से कुछ राहत मिली है, जिनमें सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन और यूएई की हबशान-फुजैराह लाइन शामिल हैं। इन वैकल्पिक मार्गों ने समुद्री बाधाओं के बावजूद आंशिक आपूर्ति बनाए रखने में मदद की।

रिटोइया ने आगे कहा कि रूस द्वारा तेल की खरीद अप्रैल तक जारी रहने की संभावना है, और ईरान और वेनेजुएला से संभावित अतिरिक्त आपूर्ति से आपूर्ति संबंधी जोखिम कम होने की उम्मीद है।

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इस बीच, कतर एनर्जी द्वारा घोषित अप्रत्याशित संकट (फोर्स मेज्योर) और होर्मुज ज्वालामुखी से संबंधित व्यवधानों के कारण कतर से एलएनजी आयात में 92% की भारी गिरावट आई है, अखबार ने बताया। इस कमी की आंशिक रूप से भरपाई अमेरिका, ओमान, अंगोला और नाइजीरिया से आयात में वृद्धि से हुई।