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सरकार का बड़ा कदम: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को 1.25 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी; वित्त मंत्रालय ने दी हरी झंडी

By Jagran BusinessEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Tue, 30 Jun 2026 03:22 PM (GMT+05:30)

वित्त मंत्रालय की समिति ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है, जिससे देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को 1.25 लाख करोड़ रुपये का बजट मिला।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को 1.25 लाख करोड़ रुपये का बजट मिला।

HighLights

  1. आईएसएम 2.0 को 1.25 लाख करोड़ रुपये का बजट मिला।

  2. देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा।

  3. 2030 तक 75% घरेलू मांग पूरी करने का लक्ष्य।

आईएएनएस, नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है, जिससे देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का अगले चरण का रास्ता साफ हो गया है।

इस प्रस्ताव को समिति ने पिछले हफ्ते मंजूरी दी थी और अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। आईएसएम 2.0 (India Semiconductor Mission 2.0) प्रस्तावित बजट आईएसएम 1.0 के तहत आवंटित 76,000 करोड़ रुपये से काफी अधिक है।

आईएसएम 1.0 के तहत सरकार ने चिप बनाने, असेंबली और डिजाइन से जुड़ी 10 सेमीकंडक्टर सुविधाओं को मंजूरी दी थी। आईएसएम 2.0 से भारत की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने के उद्देश्य से इंडस्ट्रियल गैस, स्पेशल केमिकल, कैपिटल इक्विपमेंट, एमएसएमई और सहायक सप्लायर जैसे बड़े इकोसिस्टम को मदद मिलने की उम्मीद है।

2030 तक घरेलू मांग का 75% हिस्सा पूरा करने का लक्ष्य

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से भारत 2030 तक अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का 75 प्रतिशत तक हिस्सा पूरा कर सकेगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश के ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का लक्ष्य भी पूरा हो सकेगा।

सरकार नई स्कीम को शुरू करने के लिए मंत्रालयों के बीच बातचीत पहले ही कर चुकी है और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार था। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स की खपत और उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।

भारत में 65 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स

आज भारत में 65 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का सालाना उत्पादन 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। साथ ही, देश एआई-आधारित सिस्टम, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी बना रहा है, जिनके लिए सेमीकंडक्टर चिप्स की जरूरत होती है। मांग और इनोवेशन में इस तेजी की वजह से भारत के लिए ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी जगह बनाना जरूरी हो गया है।

'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत 10 सेमीकंडक्टर प्लांट को मंजूरी दी गई है। इन प्लांट का निर्माण तेजी से चल रहा है। गुजरात के साणंद में एक यूनिट में पायलट प्रोडक्शन लाइन पहले ही शुरू हो चुकी है और एक साल के अंदर चार और यूनिट में प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। एप्लाइड मैटेरियल्स, लैम रिसर्च, मर्क और लिंडे जैसी ग्लोबल कंपनियां सपोर्टिंग फैक्टरियों और सप्लाई चेन में निवेश कर रही हैं।

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