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अब E-20 से आगे बढ़ेगी सरकार? और अधिक इथेनॉल ब्लेंडिंग की तैयारी! पीएम के सलाहकार ने डीजल सेक्शन पर भी दी जानकारी

Published: Wed, 09 Sep 2026 08:24 PM (IST)

सरकार पेट्रोल में E-20 से आगे बढ़कर अधिक इथेनॉल मिलाने की तैयारी कर रही है, जिसके लिए फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों पर ...और पढ़ें

E-20 स्तर से ज्यादा पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की अनुमति देने का विचार

E-20 स्तर से ज्यादा पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की अनुमति देने का विचार

HighLights

  1. सरकार E-20 से अधिक इथेनॉल ब्लेंडिंग की तैयारी में।

  2. फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों और शुद्ध इथेनॉल उपलब्धता पर जोर।

  3. डीजल में जैव-ईंधन एडिटिव्स, गोवर्धन योजना पर भी काम।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल का मामला लगातार चर्चा में है। इसे लेकर लोगों का मत अलग-अलग है। अब प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने कहा है कि सरकार फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों के जरिये मौजूदा E-20 स्तर से ज्यादा पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की अनुमति देने पर काम कर रही है। 'द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026' के चौथे संस्करण को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि E-20 कार्यक्रम अबतक ‘बहुत सफल’ रहा है और कई वाहन कंपनियों ने जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां पेश करने की योजना की घोषणा की है।

E-20 से आगे बढ़ने की तैयारी

तरुण कपूर ने कहा, ‘‘अब हमारा ध्यान फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों पर है और ऐसी ब्लेंडिंग की मंजूरी देना है जो E-20 से ज्यादा हो।’’ उन्होंने कहा कि ऐसी गाड़ियों की पेशकश के साथ-साथ ईंधन बिक्री केंद्रों पर शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी। कपूर ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच जैव-ईंधन पर जोर देना और भी जरूरी हो गया है। इस संकट ने आपूर्ति में रुकावट डाली है और कच्चे तेल की कीमतों को लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है, साथ ही और बढ़ोतरी की आशंका भी बनी हुई है।

E-20 को लेकर गलत जानकारी फैलाई गई

तरुण ने कहा, ‘‘यह जरूरी है कि हम देश में जो कुछ भी उपलब्ध है, उसका इस्तेमाल करने की कोशिश करें।’’ उन्होंने कहा कि देश में इथेनॉल उत्पादन की क्षमता पेट्रोल में इसे मिलाने की जरूरतों से ज्यादा हो गई है, और इस अतिरिक्त क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए उद्योग को इथेनॉल के अन्य इस्तेमाल के तरीकों पर भी विचार करना होगा।

E-20 को लेकर हालिया आलोचना का जवाब देते हुए कपूर ने कहा कि इसमें से ज्यादातर गलत जानकारी या ‘खास मकसद से की गई आलोचना’ के कारण थी। उन्होंने कहा कि रिसर्च से पता चला है कि E-20 अच्छा काम करता है और ईंधन क्षमता में थोड़ी-बहुत कमी की भरपाई ज्यादा ‘ऑक्टेन’ सामग्री से हो जाती है।

डीजल को लेकर नया प्रयोग

डीजल सेक्शन के बारे में कपूर ने कहा कि सरकार जैव-ईंधन एडिटिव्स पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर आइसोब्यूटेनॉल के साथ किए जा रहे प्रयोग सफल होते हैं, तो यह जैव-ईंधन के लिए एक ‘बड़ा’ नया रास्ता खोल सकते हैं, क्योंकि रिफाइनरी उत्पादन में डीजल का बड़ा हिस्सा होता है। उन्होंने सरकार की नई गोवर्धन योजना का भी जिक्र किया, जो संपींडित बायोगैस (सीबीजी) को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों से मिलने वाले मदद को एक साथ लाती है।

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इस क्षेत्र में अब तक सीमित प्रगति हुई है। कपूर ने इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों से सीबीजी उत्पादन और पोटाश जैसे दूसरे मूल्यवर्धित उप-उत्पादों के क्षेत्र में भी काम करने का आग्रह किया। कपूर ने कहा कि सरकार जैव-ईंधन क्षेत्र के लिए ‘पूरी तरह से प्रतिबद्ध’ है और यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि जैसे-जैसे बाजार का विस्तार हो, मौजूदा निवेश में कोई अनिश्चितता न आए।