नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। भारत के पास विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करन के लिए सिर्फ एक दशक (10 साल) का ही वक्त है। ऐसा करने के लिए उसे सबसे ज्यादा शिक्षा क्षेत्र पर ध्यान देना होगा। वहीं अगर वह इस मोर्चे पर सफल नहीं रहता है तो जनसांख्यिकी लाभांश नुकसान में बदल जाएगा। यह जानकारी एक रिपोर्ट के जरिए सामने आई है।

सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च विंग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत इन प्रयासों को एक साथ करने में सक्षम नहीं हुआ तो फिर वो कभी भी विकसित राष्ट्रों की कतार में शामिल नहीं हो पाएगा। इस रिपोर्ट में कहा गया, “भारत के पास अब विकसित देश का टैग पाने के लिए सिर्फ एक दशक की ही सीमित खिड़की है, नहीं तो वो फिर हमेशा ही उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले ग्रुप में अटका रहेगा। नीति निर्माताओं को जागना चाहिए और इसका अनुभव करना चाहिए।”

इस रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार और नीति निर्माताओं को देश की युवा आबादी पर ध्यान देना होगा ताकि उनका एक बेहतर नागरिक बनना सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही जनसांख्यिकीय लाभांश को समझने और अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा में निवेश करना चाहिए। इस रिपोर्ट में चेताया गया है कि देश का जनसांख्यिकी लाभांश, जो कि उसकी ताकत है वास्तव में 2030 तक उसके लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। इसमें आगे कहा गया कि जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्ति दर्शाती है कि पिछले दो दशकों में वृद्धिशील जनसंख्या वृद्धि स्थिर बनी हुई है और लगभग 18 करोड़ है।

Posted By: Praveen Dwivedi