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ऑस्ट्रेलिया से मसूर मंगाने वाले भारत ने उसी को बेच दिया 2.5 टन दाल! देश में यहां उग रही GI टैग वाली तुअर

Published: Thu, 29 Oct 2026 04:33 PM (IST)

भारत ने पहली बार तेलंगाना की जीआई टैग वाली तंदूर रेडग्राम (तुअर दाल) ऑस्ट्रेलिया को निर्यात की है। यह पहल ...और पढ़ें

भारत ने किया जीआई टैग वाली दाल का एक्सपोर्ट

भारत ने किया जीआई टैग वाली दाल का एक्सपोर्ट

HighLights

  1. भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को तेलंगाना की जीआई तुअर दाल भेजी।

  2. तंदूर रेडग्राम तेलंगाना का पहला जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पाद।

  3. एपेड़ा ने निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने में मदद की।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने तेलंगाना की GI टैग वाली तुअर दाल को पहली बार ऑस्ट्रेलिया के बाजार में भेजा है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की मदद से 28 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद से 2.5 टन तुअर दाल की पहली खेप रवाना की गई। इस पहल का उद्देश्य तेलंगाना के क्षेत्रीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाना और किसानों तथा निर्यातकों के लिए नए अवसर तैयार करना है।

यह खेप हैदराबाद की कंपनी दुर्गा एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स ने ‘अम्मास’ (AMMAAS) ब्रांड के तहत निर्यात की है। इसे समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया भेजा जा रहा है, जहां भारत्थमा पीटीवाई लिमिटेड इसका आयात करेगी। निर्यातक कंपनी APEDA में रजिस्टर्ड है और तेलंगाना से चावल, दालों, मसालों तथा किराना उत्पादों का निर्यात करती है।

तेलंगाना का पहला GI टैग वाला एग्री प्रोडक्ट

तंदूर रेडग्राम तेलंगाना का पहला कृषि उत्पाद है, जिसे भौगोलिक संकेतक (GI) रजिस्ट्रेशन मिला है। इसकी खेती मुख्य रूप से तेलंगाना के तंदूर क्षेत्र के चार मंडलों तंदूर, बशीराबाद, पेद्देमुल और येलाल में वर्षा आधारित क्षेत्रों में की जाती है। जीआई टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट पहचान को उसके भौगोलिक क्षेत्र से जोड़ता है। तंदूर रेडग्राम को यह पहचान मिलने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी अलग पहचान बनाने का अवसर मिलता है। ऑस्ट्रेलिया को पहली खेप का निर्यात इस उत्पाद के लिए नए विदेशी बाजार तलाशने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

क्या है इस दाल की खासियत?

इस दाल की खासियत यहां की उपजाऊ गहरी काली मिट्टी, अट्टापुलगाइट नामक चिकनी मिट्टी के खनिज और चूना पत्थर के पर्याप्त भंडार से जुड़ी है। इसमें लगभग 22–24 फीसदी तक प्रोटीन होता है। इसका स्वाद अच्छा होने के साथ पकाने की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता भी बेहतर मानी जाती है।

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APEDA के मुताबिक, वह GI टैग वाले कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यातकों को बाजार से जोड़ने, व्यापार मेलों में भागीदारी को प्रोत्साहित करने और निर्यात अवसरों की जानकारी देने जैसे काम करता है। इससे किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (APEDA), किसान उत्पादक कंपनियों और निर्यातकों को नए बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

ऑस्ट्रेलिया है भारत का दाल सप्लायर

भारत दालों की घरेलू आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भर है। इसके लिए अफ्रीकी देशों और कनाडा के अलावा ऑस्ट्रेलिया भी हमारा प्रमुख सप्लायर देश है। मुख्य रूस से ऑस्ट्रेलिया से चना और मसूर की दाल मंगाई जाती है। अब भारत से ऑस्ट्रेलिया को तंदूर रेडग्राम की सप्लाई की गई है।