पहले अमेरिका, फिर जापान, अब भारत में महंगा होगा बैंक लोन; RBI कितनी बढ़ा सकता है ब्याज दरें?
दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के बाद, भारत में भी बैंक लोन और ईएमआई महंगी होने की आशंका है।
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RBI कितनी बढ़ा सकता है ब्याज दरें?
HighLights
अमेरिका और जापान ने अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की।
भारत में बैंक लोन और ईएमआई महंगी होने की आशंका।
RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि कर सकता है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: दुनियाभर के केंद्रीय बैंक (central banks) महंगाई और ग्लोबल आर्थिक हालातों को देखते हुए कड़े कदम उठा रहे हैं। अमेरिका (US) में हुई ब्याज दरों को लेकर हलचल के बाद, अब जापान (Japan) ने अपनी ब्याज दरों में भारी इजाफा किया है। इस ग्लोबल उथल-पुथल का सीधा असर अब भारत (India) पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे आम आदमी के लिए बैंक लोन और ईएमआई (EMI) का महंगा होना लगभग तय माना जा रहा है।
अमेरिका ने बढ़ाए ब्याज दर
अमेरिका के केंद्रीय बैंक Federal Reserve ने सितंबर 2026 में 3 साल में पहली बार ब्याज दरों में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद अमेरिका में बेंचमार्क ब्याज दर बढ़कर 3.75% से 4.00% के नए दायरे में पहुंच गई है।
जापान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड
जापान के केंद्रीय बैंक (bank of Japan) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपनी ब्याज दरों को बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह पिछले 31 सालों का सबसे उच्चतम स्तर है। जापान जैसे देश में ब्याज दरों का इस कदर बढ़ना ग्लोबल मार्केट में लिक्विडिटी और महंगाई को लेकर एक बड़े बदलाव का संकेत है।
क्या भारत में भी होंगे बदलाव?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी ब्याज दरें बढ़ाने की इसी राह पर चलने वाला है? बता दें कि SBI रिसर्च और अन्य विश्लेषकों का अनुमान है कि RBI अपनी आगामी अक्टूबर और दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) समीक्षाओं में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (bps) की बढ़ोतरी कर सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, खुदरा (Retail) और थोक (Wholesale) महंगाई में तेजी के कारण नेगेटिव रियल इंटरेस्ट रेट्स का खतरा बढ़ गया है, जिससे RBI रेपो रेट को 6.5% के स्तर की ओर ले जा सकता है।
RBI को क्यों उठाना पड़ सकता है यह सख्त कदम?
अगस्त महीने में भारत की खुदरा महंगाई दर (Retail inflation) बढ़कर 4.8% हो गई है, जो जनवरी के बाद सबसे ज्यादा है। वहीं, ईंधन और अन्य चीजों के कारण थोक महंगाई (wholesale inflation) 9.9% पर पहुंच चुकी है। SBI रिसर्च का अनुमान है कि अक्टूबर 2026 तक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई 6.5% के पार जा सकती है, जिसके 2027 की शुरुआत में ही 6% से नीचे आने की उम्मीद है।
इसके साथ ही ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। तेल की इन बढ़ती कीमतों की वजह से देश में 'इंपोर्टेड प्राइस प्रेशर' (आयातित महंगाई) बढ़ रहा है।
