जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली । मॉरीसस रूट का सहारा लेकर हो रही कर चोरी को रोकने के लिए सरकार ने दोहरी कराधान निवारण संधि (डीटीएए) में संशोधन किया है। मॉरीसस के साथ इस संधि में बदलाव के बाद सरकार को एक अप्रैल 2017 के बाद भारतीय कंपनी के शेयरों के बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स वसूल कर सकेगी। संधि के नए प्रावधानों के तहत भारतीय रेजिडेंट कंपनी पर एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2019 के बीच टैक्स दर का 50 प्रतिशत ही टैक्स लगेगा। हालांकि एक अप्रैल 2019 के बाद पूरी दर से कैपिटल गेन टैक्स वसूला जाएगा।

वित्त मंत्रालय का कहना है कि इस संशोधन के बाद भारत-मॉरीसस संधि का काफी समय से चला आ रहा दुरुपयोग रुकेगा जिससे राजस्व हानि पर भी नियंत्रण लगेगा। साथ ही इससे निवेश का प्रवाह बढ़ेगा और भारत तथा मॉरीसस के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान में भी तेजी आएगी।

उल्लेखनीय है कि भारत ने 1983 में मॉरीसस के साथ दोहरा कराधान निवारण संधि की थी। मात्र 13 लाख की आबादी वाला यह देश भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। भारत की अक्सर शिकायत रही है कि मॉरीसस से आने वाला अधिकांश निवेश वास्तविक विदेशी निवेश नहीं बल्कि भारतयीों का ही पैसा है जो वे मॉरीसस के माध्यम से देश के भीतर निवेश कर रहे हैं। भारत और मॉरीसस के बीच हुए संधि मंे इस बदलाव के बाद अब कंपनियां मॉरीसस के नाम पर कर देने से नहीं बच सकेंगी।

अब तक दोनों देशों के बीच संधि में यह प्रावधान था कि मॉरीसस में पंजीकृत किसी कंपनी की अगर भारत मंे परिसंपत्तियां हैं तो उन पर सिर्फ मॉरीसस में ही टैक्स लग सकता था। भारत में अल्पावधि कैपिटल गेन पर दस प्रतिशत टैक्स लगता है लेकिन मॉरीसस में ऐसा नहीं है। इसलिए ये कंपनियां न तो भारत में टैक्स का भुगतान करती थीं और न ही मॉरीसस में।

राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने कहा कि संधि में बदलाव से विदेशी निवेशकों के लिए कर संबंधी मामलों में निश्चितता आएगी।

Edited By: Sachin Bajpai