नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। बहुत बार ऐसा होता है कि कर्मचारी अपनी जॉब बदलते वक्त कुछ चीजों को अनदेखा कर देते हैं, जिससे बाद में उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ जाता है। इन परेशानियों में सबसे अहम ईपीएफ अकाउंट को लेकर है। अगर आप कंपनी छोड़ते समय तय प्रक्रिया का पालन नहीं करते हो, तो हो सकता है कि आगे अपने ईपीएफ के पैसे का ट्रांसफर या निकासी ना कर पाएं। ऐसा भी हो सकता है कि आप अपने ईपीएफ अकाउंट पर लॉग-इन भी नहीं कर पाएं। आइए उदाहरण के जरिए जानते हैं कि यह समस्या कर्मचारी के सामने क्यों खड़ी होती है।

एक कर्मचारी जिसका नाम रमेश है, वह आईटी कंपनी में जॉब कर रहा है। इसी दौरान उसे दूसरी एक आईटी कंपनी से जॉब ऑफर आता है, जो उसे अच्छी सैलरी हाइक भी दे रहे हैं। वह कंपनी चाहती है कि रमेश 10 दिन बाद ही उनके यहां ज्वाइन करे। रमेश इस ऑफर को स्वीकार कर लेता है और अपनी पुरानी कंपनी में इस्तीफा स्वीकार होने से पहले ही नई कंपनी ज्वाइन कर लेता है।

अब रमेश को अपने ईपीएफ अकाउंट को लेकर समस्या आने लगी है। वह न तो अपने ईपीएफ मनी को ट्रांसफर करा पा रहा है और ना ही उसकी निकासी कर पा रहा है। यही नहीं, रमेश अपने ईपीएफ अकाउंट पर लॉग-इन भी नहीं कर पा रहा है। रमेश को यह परेशानी जॉब बदलते समय तय प्रक्रिया का पालन नहीं करने की वजह से हो रही है। जब रमेश अपनी पर्सनल डिटेल्स के साथ लॉग-इन करने की कोशिश करता है, तो डाटा मिसमैच दिखाई देता है।a

दरअसल, रमेश के ईपीएफ रिकॉर्ड में पिछली कंपनी द्वारा एग्जिट डेट नहीं डाली गई है। इपीएफओ के नियमों के अनुसार, जब तक कर्मचारी जॉब नहीं छोड़ देता, तब तक वह अपने ईपीएफ मनी की निकासी और ट्रांसफर नहीं कर सकता है।

अब रमेश अपनी इस समस्या को लेकर ईपीएफओ कार्यालय जाता है। वहां उसे बताया जाता है कि वह अपनी पिछली कंपनी से उसके ईपीएफ अकाउंट में डेट ऑफ एग्जिट की डिटेल भरने को कहे। साथ ही रमेश को कहा गया कि वह अपने पर्सनल मोबाइल नंबर को ईपीएफओ के साथ अपडेट करे।

अब रमेश के पास अपने पुराने एंप्लॉयर से मिलने के सिवाय और कोई चारा नहीं है। जब वह अपने पुराने एंप्लॉयर से ईपीएफओ रिकॉर्ड में डेट ऑफ एग्जिट भरने के लिए कहता है, तो वे उससे नोटिस पीरियड सर्व नहीं करने के ऐवज में एक महीने की सैलरी जमा करने के लिए कहते हैं। दरअसल, रमेश के अपॉइंटमेंट लेटर में यह शर्त रखी गई थी।

अब रमेश को एक महीने की सैलरी अपने पुराने एंप्लॉयर के पास जमा करानी ही होगी। यह राशि लेने के बाद ही एंप्लॉयर रमेश के ईपीएफओ रिकॉर्ड में डेट ऑफ एग्जिट की डिलेट भरेगा। जब ईपीएफओ रिकॉर्ड में पुरानी कंपनी से डेट ऑफ एग्जिट आ जाएगी, तब रमेश का ईपीएफ अकाउंट नए एंप्लॉयर के पास ट्रांसफर हो सकेगा। इसलिए रमेश के सामने आयी समस्याओं से बचने के लिए हमें हमेशा जॉब बदलते समय पूरी प्रक्रिया का पालन करने की कोशिश करनी चाहिए।

Posted By: Pawan Jayaswal

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