Air India से IDBI Bank तक, मोदी सरकार के 10 साल में 13 बड़े विनिवेश, कौन-कौन सी सरकारी कंपनियां बिकीं?
IDBI Bank privatization: केंद्रीय कैबिनेट ने 62 साल पुराने IDBI बैंक की बिक्री को मंजूरी दे दी है। सरकार और ...और पढ़ें
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Air India से IDBI Bank तक, मोदी सरकार के 10 साल में 13 बड़े विनिवेश, कौन-कौन सी सरकारी कंपनियां बिकीं?

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| केंद्रीय कैबिनेट ने 62 साल पुराने आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank Deal) को बेचने की मंजूरी दे दी। इस फैसले के तहत सरकार और LIC मिलकर बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी 'कनाडा इंक' को बेचेंगे, जिसकी पैरेंट कंपनी फेयरफैक्स (Fairfax) है। यह डील करीब 52,878 करोड़ रुपए में होने का प्रस्ताव है।
अगर यह डील पूरी होती है, तो यह मोदी सरकार के पिछले 10 सालों के कार्यकाल का 13वां और अब तक का सबसे बड़ा विनिवेश यानी सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री होगी। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक दशक में मोदी सरकार ने एअर इंडिया से लेकर कई बड़ी सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेची है।
अब तक कौन-कौन सी सरकारी कंपनियां बिकीं?
IDBI बैंक से पहले, सरकार की सबसे बड़ी डील्स में 2017-18 में एचपीसीएल (HPCL) और 2021-22 में एअर इंडिया की बिक्री शामिल थी। एचपीसीएल को 36,915 करोड़ रुपए में, जबकि एयर इंडिया को 18,000 करोड़ रुपए में टाटा ग्रुप ने खरीदा था।
बीते 10 सालों में केंद्र सरकार ने एविएशन, एनर्जी, शिपिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कई कंपनियों को या तो प्राइवेट हाथों में सौंपा है, या फिर दूसरी सरकारी कंपनियों को ट्रांसफर किया है।
10 साल के 13 बड़े विनिवेश की पूरी लिस्ट
- वित्त वर्ष 2027: IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपए में बिकने वाली है।
- वित्त वर्ष 2027: इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन को 119 करोड़ रुपए में बेचा गया।
- वित्त वर्ष 2024: MSTC लिमिटेड की कंपनी फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड को जापान की कोनोइके ट्रांसपोर्ट ने 320 करोड़ रुपए में खरीदा। इसका पैसा सरकारी खजाने में नहीं गया।
- वित्त वर्ष 2023: केद्र सरकार और राज्य की सरकारी कंपनियों का जॉइंट वेंचर नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड को टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स ने 12,100 करोड़ रुपए में खरीदा। इसका पैसा भी सरकारी खजाने में नहीं गया।
- वित्त वर्ष 2022: एयर इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों (AIXL और AISATS) को टाटा ग्रुप की टैलेस प्राइवेट लिमिटेड ने 18,000 करोड़ रुपए में खरीदा। इसमें से टाटा ने 2,700 करोड़ रुपए नकद दिए और 15,300 करोड़ रुपए का कर्ज अपने ऊपर लिया।
- वित्त वर्ष 2020: THDC इंडिया लिमिटेड को NTPC ने 7,500 करोड़ रुपए में खरीदा।
- वित्त वर्ष 2020: नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NEEPCO) को भी NTPC ने 4,000 करोड़ रुपए में खरीदा।
- वित्त वर्ष 2020: कामराजर पोर्ट लिमिटेड को चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट ने 2,383 करोड़ रुपए में खरीदा।
- वित्त वर्ष 2019: पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) ने रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कॉर्पोरेशन (REC) में सरकार की 52.63% हिस्सेदारी 14,500 करोड़ रुपए में खरीदी।
- वित्त वर्ष 2019: HSCC (इंडिया) लिमिटेड को NBCC ने 285 करोड़ रुपए में खरीदा।
- वित्त वर्ष 2019: नेशनल प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NPCC) को WAPCOS ने 80 करोड़ रुपए में खरीदा।
- वित्त वर्ष 2019: ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को कई बंदरगाहों के एक ग्रुप (कंसोर्टियम) ने 1,049 करोड़ रुपए में खरीदा।
- वित्त वर्ष 2018: ONGC ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की 51.11% हिस्सेदारी 36,915 करोड़ रुपए में खरीदी।
कौन बनेगा IDBI बैंक का नया मालिक
IDBI बैंक यानी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (Industrial Development Bank of India) की हिस्सेदारी को कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को 52,878 करोड़ रुपए में बेचा जाएगा। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को भारतीय-कनाडाई अरबपति प्रेम वत्सा (Prem Vatsa) का समर्थन हासिल है।
प्रेम वत्सा का जन्म भारत के हैदराबाद में हुआ था। और उन्होंने IIT मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की और इसके बाद वह 1972 में कनाडा चले गए और यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो से MBA किया।
उन्होंने 1985 में टोरंटो में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की स्थापना की। और आज इस कंपनी का मार्केट कैप लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपए है।
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