180 दिन का नियम, लेकिन लग रहे 2 साल! क्यों दिवालिया कानून से कर्ज वसूली हो रही है मुश्किल
दिवालिया कानून (IBC) के तहत कर्ज वसूली की दर 54% से घटकर 20% रह गई है, जबकि मामलों के निपटारे ...और पढ़ें

दिवालिया कानून से कर्ज वसूली में गिरावट, समाधान में लग रहा दोगुना समय
HighLights
IBC के तहत कर्ज वसूली दर 54% से घटकर 20% हुई।
मामलों के निपटारे में औसत 744 दिन लग रहे, जो निर्धारित से अधिक।
वित्त मंत्री ने लोकसभा में दी जानकारी, सरकार मानती है IBC सफल।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश के वित्तीय सेक्टर में कर्ज वसूली की प्रक्रिया को दुरुस्त करने और आम निवेशकों में भरोसा कायम करने के लिए गठित दिवालिया व बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) यानी दिवालिया कानून का प्रदर्शन कर्ज वसूली के मामले में लगातार फिसड्डी होता जा रहा है। पहले इस कानून के तहत जितने मामले आते थे उसमें कुल बकाये कर्ज का 54-55 फीसदी तक राशि वसूल हो जाती थी लेकिन अब यह रफ्तार घटते घटते 20 फीसदी पर आ गई है। यह जानकारी वित्त व कारपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वयं लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी है।
वित्त मंत्री ने जो आंकड़ें दिए हैं वो बताते हैं कि आइबीसी के तहत आने आने वाले मामले तो बढ़ रहे हैं लेकिन इनसे कर्ज वसूली लगातार कम होती जा रही है। इसके बावजूद केंद्र सरकार मानती है कि आइबीसी अपने उद्देश्यों में सफल रही है।
233 मामले में 42,003 करोड़ रुपये की वसूली हुई
दी गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2025-26 में आइबीसी में कुल 233 मामले आए और इनसे 42,003 करोड़ रुपये की वसूली हुई जो कुल बकाये राशि का सिर्फ 20 फीसदी थी। जबकि इसके पिछले वर्ष 259 मामलों में 54,604 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी और यह 37 फीसदी था। इसी तरह से वर्ष 2017-18 (जब आइबीसी की शुरुआत हुई) में सिर्फ 18 मामलों में 3,807 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी जो 54 फीसदी था। यहां बताते चलें कि जब कोई कंपनी अपनी देनदारियां चुकाने में असफल हो जाती है तो उस संबंध में दायर आरोप के आधार पर कर्ज वसूली प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसके तहत कंपनी की परिसंपत्तियों को बेच कर निवेशकों व कर्जदारों को लौटाया जाता है। सरकार ने यह फैसला तब किया था जब भारतीय बैंकिंग सेक्टर फंसे कर्जे की समस्या से बहुत ही ज्यादा जूझ रही थी।
किसी भी मामले को 180 दिनों मे निपटाने का प्रावधान
दिवालिया कानून में सरकार पिछले आठ वर्षों में कई बार संशोधन कर चुकी है लेकिन इसके प्रदर्शन में कोई खास सुधार नहीं आया है। इसके तहत एक मामले के समाधान में लगने वाला समय भी लगातार बढ़ता रहा है। इस कानून के तहत किसी भी मामले को 180 दिनों मे निपटाने का प्रावधान है। इसमें 90 दिनों का ग्रेस पीरियड भी दिया जाता है। लेकिन ताजी जानकारी यह है कि वर्ष 2025-26 में हर मामले को निपटाने में औसतन 744 दिनों का समय लगा है। पिछले साल यह औसत समम 713 दिनों का था। हालांकि कुल राशि में उतार-चढ़ाव है लेकिन फीसदी वसूली में निरंतर गिरावट निवेशकों और बैंकों के लिए चिंता का विषय है।
