यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 17, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हुंडई एसयूवी, एमपीवी बाजार में तहलका मचाने को तैयार
जयप्रकाश रंजन, चेन्नई। भारतीय कार बाजार की बदलती रंगत में रंगने के लिए हुंडई मोटर इंडिया (एचएमआइ) भी तैयार है। ...और पढ़ें

जयप्रकाश रंजन, चेन्नई। भारतीय कार बाजार की बदलती रंगत में रंगने के लिए हुंडई मोटर इंडिया भी तैयार है। देश की यह दूसरी सबसे बड़ी कार कंपनी अगले वर्ष 2014 में दो नई पैसेंजर कार पेश करने की तैयारी में है। इसमें एक सस्ती स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) होगी। इसे कंपनी ने फोर्ड की इकोस्पोर्ट और मारुति की अर्टिगा के मुकाबले उतारने का फैसला किया है। इसके अलावा एक मल्टी परपज व्हीकल (एमपीवी) होगी, जो अपेक्षाकृत थोड़ी महंगी होगी। इसके साथ ही कंपनी ने ग्रामीण भारत में भी तेजी से पैर फैलाने का फैसला किया है। एचएमआइ हर वर्ष लगभग तीन दर्जन नए बिक्री केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में खोलने जा रही है।
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एचएमआइ के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट व प्रमुख (मार्केटिंग व सेल्स) राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि भारत में लंबे समय तक काम करने की इच्छा रखने वाली कोई भी कंपनी एसयूवी बाजार को नजरंदाज नहीं कर सकती है। यहां बिकने वाली कुल कारों में एसयूवी की हिस्सेदारी बढ़कर 21 फीसद हो चुकी है। आने वाले दिनों में यह और बढ़ेगी। इसलिए कंपनी बाजार का बहुत ही गंभीरता से अध्ययन कर रही है। हुंडई के पास इस वर्ग में भारतीय ग्राहकों की पसंद की कार पेश करने की तकनीकी क्षमता है। उन्होंने स्पष्ट किया कंपनी की एसयूवी चार मीटर से छोटे प्लेटफॉर्म पर ही होगी। इससे कंपनी को कीमत कम रखने में मदद मिलेगी। एमपीवी के बारे में उन्होने ज्यादा विस्तार से नहीं बताया, लेकिन काम दोनों पर चल रहा है। इन्हें कुछ ही अंतराल पर पेश किया जाएगा।
भारतीय कार बाजार दो दशकों के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। पैसेंजर कारों की बिक्री में चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में लगभग 11 फीसद की गिरावट आ चुकी है। इसके बावजूद एसयूवी बाजार में तेजी का माहौल है। फोर्ड की इकोस्पोर्ट के लिए इतनी मांग है कि कंपनी को बुकिंग बंद करनी पड़ी है। शुरुआती देरी के बाद मारुति को अर्टिगा उतारनी पड़ी, जिसने कंपनी की गिरती बिक्री को संभालने में मदद की है। इसी वजह से हुंडई ने भी एसयूवी बाजार में उतरने का फैसला किया है। श्रीवास्तव के मुताबिक अगर भविष्य में कंपनी को अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ानी है, तो उसे इस बाजार में मजबूती से उतरना ही पड़ेगा। इस समय देश के कार बाजार में हुंडई की हिस्सेदारी लगभग 21 फीसद है। वर्ष 1998 में उत्पादन शुरू होने के बाद से हुंडई और इसके सहयोगी वेंडर भारतीय बाजार में लगभग 4 अरब डॉलर का निवेश कर चुके हैं। गुरुवार को हुंडई ने अपनी 50 लाखवीं कार का उत्पादन किया। इसके साथ ही हुंडई ने भारत में सबसे कम समय में 50 लाख कार बनाने का रिकॉर्ड बनाया है।
