Union Budget 2026: सरकार के पास बजट के लिए कहां से आता है पैसा? उधारी समेत इन तरीकों से जुटाया जाता फंड
भारत सरकार अपने बजट (Union Budget 2026) के लिए विभिन्न स्रोतों से राजस्व जुटाती है। इसमें मुख्य रूप से प्रत्यक्ष ...और पढ़ें

सरकार बजट के लिए फंड कहां-कहां से जुटाती है?
HighLights
सरकार के राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है टैक्स
गैर-कर राजस्व में फीस, जुर्माने और लाभांश शामिल
खर्चों से अधिक होने पर सरकार उधार लेती है
नई दिल्ली। भारत सरकार हर साल देश के विकास, प्रशासन और जनकल्याण के लिए बजट पेश करती है। बजट केवल खर्चों की लिस्ट नहीं होता, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकार को पैसा कहां-कहां से मिलेगा। सरकार अलग-अलग स्रोतों से फंड जुटाती है। इन स्रोतों में मुख्य रूप से टैक्स रेवेन्यू, नॉन-टैक्स रेवेन्यू, उधारी और अन्य कैपिटल रिसीट्स शामिल होती हैं। इन सभी को मिलाकर सरकार देश की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करती है।
टैक्स होता है सबसे बड़ा सोर्स
सरकार के रेवेन्यू का सबसे बड़ा सोर्स होता है टैक्स। टैक्स दो प्रकार के होते हैं - इनडायरेक्ट टैक्स और डायरेक्ट टैक्स। डायरेक्ट टैक्स में इनकम और कॉरपोरेट टैक्स शामिल हैं, जो व्यक्ति या कंपनियों की कमाई पर लगाए जाते हैं।
इनडायरेक्ट टैक्स वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाते हैं, जिनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रमुख है। पेट्रोल, डीजल और शराब जैसे उत्पादों पर लगने वाला उत्पाद शुल्क भी सरकार को अच्छी खासी आय देता है। टैक्स सिस्टम के जरिए सरकार न केवल रेवेन्यू जुटाती है, बल्कि आर्थिक असमानता को कम करने का प्रयास भी करती है।
नॉन-टैक्स रेवेन्यू
टैक्स के अलावा सरकार को नॉन-टैक्स रेवेन्यू से भी इनकम होती है। इसमें सरकारी सेवाओं की फीस, जुर्माने, लाइसेंस शुल्क और सरकारी कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड शामिल होता है। रेलवे, डाक, पब्लिक सेक्टर के बैंक और अन्य सरकारी उपक्रम सरकार को रेवेन्यू प्रदान करते हैं।
इसके अलावा सरकार प्राकृतिक संसाधनों जैसे कोयला, खनिज, स्पेक्ट्रम आदि की नीलामी से भी फंड हासिल करती है। हालांकि यह इनकम टैक्स की तुलना में कम होती है, फिर भी बजट में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
उधारी से भी आता है फंड
जब सरकार की आय खर्चों से कम पड़ जाती है, तो वह उधार का सहारा लेती है। सरकार देश में मौजूद बैंकों, बीमा कंपनियों और आम जनता से सरकारी बॉन्ड के माध्यम से डेब्ट लेती है। छोटी बचत योजनाएं भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।
इसके अलावा सरकार अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विदेशी सरकारों से भी कर्ज ले सकती है। कभी-कभी सरकार सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर फंड जुटाती है, जिसे विनिवेश कहा जाता है। इस तरह विभिन्न स्रोतों से पैसा जुटाकर भारत सरकार बजट के माध्यम से देश के विकास और कल्याण की योजनाओं को आगे बढ़ाती है।
