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रेपो रेट बढ़ने के बाद HDFC ने दी राहत, MCLR दर में की कटौती; कितनी कम होगी लोन की EMI?

Published: Wed, 07 Oct 2026 05:54 PM (IST)Updated: Wed, 07 Oct 2026 06:05 PM (IST)

Repo Rate Hike: HDFC बैंक ने रेपो रेट वृद्धि के बावजूद अपने MCLR में 5 से 15 बेसिस पॉइंट की ...और पढ़ें

रेपो रेट बढ़ने के बाद सबसे बड़े प्राइवेट बैंक ने दी राहत, MCLR दर में की कटौती; कितनी कम होगी लोन की EMI?

रेपो रेट बढ़ने के बाद सबसे बड़े प्राइवेट बैंक ने दी राहत, MCLR दर में की कटौती; कितनी कम होगी लोन की EMI?

HighLights

  1. HDFC बैंक ने MCLR दरों में 5-15 बेसिस पॉइंट की कटौती की।

  2. नई MCLR दरें अब 7.75% से 8.55% के बीच होंगी।

  3. MCLR से जुड़े लोन की EMI पर ही पड़ेगा इसका असर।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। जहां आरबीआई ने लोगों को रेपो रेट (Repo Rate Hike) बढ़ाकर झटका दिया है, वहीं एक बैंक ऐसा है जिसने अपने ग्राहकों के लिए अच्छी खबर दी है। दरअसल HDFC बैंक ने अपने MCLR (Marginal Cost of Funds based Lending Rate) में कटौती की है और ये नई दरें आज से ही लागू मानी जाएंगी। आईए जानते हैं कि ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

MCLR में कितनी हुई कटौती?

HDFC Bank ने अलग-अलग अवधियों के लिए एमसीएलआर में 5 से लेकर 15 बेसिस प्वाइंट तक की कमी की है। कटौती के बाद अब बैंक की लेटेस्ट एमसीएलआर रेट 7.75%-8.55% हो गई है:

  • ओवरनाइट एमसीएलआर: घटकर 7.80% हो गई है।
  • 1 महीने की एमसीएलआर: 7.75% (इसमें सबसे ज्यादा 15 bps की कटौती हुई है)
  • 3 महीने की एमसीएलआर: 7.95%
  • 6 महीने की एमसीएलआर: 8.15%
  • 1 साल की एमसीएलआर: 8.30% (पहले यह 8.35% थी)
  • 2 साल की एमसीएलआर: 8.40% (पहले यह 8.45% थी)
  • 3 साल की एमसीएलआर: 8.55% (पहले यह 8.60% थी)

होम लोन की EMI पर क्या होगा असर?

ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या अब उनके होम लोन की ईएमआई तुरंत कम हो जाएगी। इसका सीधा जवाब है नहीं। इस कटौती का फायदा सिर्फ उन्हीं ग्राहकों को मिलेगा जिनका लोन एमसीएलआर (MCLR) से जुड़ा हुआ है और उनके लोन की 'रीसेट डेट' (Reset Date) आ चुकी है। लेकिन अगर आपका लोन किसी दूसरे बेंचमार्क जैसे रेपो रेट से जुड़ा है, तो बैंक की इस एमसीएलआर कटौती का आपके लोन पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

एमसीएलआर (MCLR) क्या होता है?

एमसीएलआर वो कम से कम ब्याज दर होती है, जिससे नीचे बैंक आम तौर पर किसी को भी लोन नहीं दे सकते हैं। साल 2016 में आरबीआई ने इसे लागू किया था। इसमें बदलाव होने से इससे जुड़े फ्लोटिंग रेट वाले लोन की ब्याज दरों पर असर पड़ता है।

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