नई दिल्ली: रेटिंग एजेंसी फिच के मुताबिक देश के करीब 11 बैंक पूंजी की कमी से जूझ रहे हैं। फिच के मुताबिक बेसल 3 मानकों के तहत पूंजी की जरूरत को देखते हुए भारतीय बैंकों के जरूरी न्यूनतम पूंजी से चूक जाने की आशंका तेज है। 27 भारतीय बैंकों का अध्ययन करने के बाद फिच ने कहा कि करीब 11 बैंकों का कैपिटल एडोक्यूसी रेशियो (सीएआर) न्यूनतम मानक 11.5 फीसदी से भी कम है। यह दर साल 2019 (मार्च) के वित्तीय वर्ष के लिए न्यूनतम मानक है।

फिच के मुताबिक, सरकार के स्वामित्व वाले बैंकों की हालत उनके न्यूनतम बफर पूंजी के कारण ज्यादा खराब है। इसके अलावा 6 के पास इतनी भी पूंजी नहीं है कि वो साल 2017 तक की अपनी जरूरतों को पूरा कर सके। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक बेसल 3 के मानकों को पूरा करने के लिए भारतीय बैंकों को करीब 90 अरब डॉलर (6000 अरब रुपए) से ज्यादा की जरूरत होगी। सरकार ने वित्त वर्ष 2019 तक सार्वजनिक बैंकों के लिए 700 अरब रुपए के निवेश की योजना बनाई है। इसके तहत उसने जुलाई महीने में बैंकों को 229 अरब रुपए देने की घोषणा की थी।

एजेंसी के मुताबिक इस पूंजी का प्रवाह बैंकों की जरूरतों को पूरा करने और उनकी बैलेंस सीट को सक्षम बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। सार्वजनिक बैंक पूंजी के लिए पूरी तरह से सरकार पर निर्भर होते हैं। आपको बता दें कि बीते एक साल में बैंकों की वित्तीय हालत काफी खराब हुई है और इसी वजह से उनका इक्विटी मूल्यांकन भी प्रभावित हुआ है।

Posted By: MMI Team

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