GST काउंसिल की 57वीं बैठक में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न और रिफंड प्रक्रिया में हुए 13 बड़े बदलाव, एक-एक करके सभी को जानें
57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी दरों में कटौती के बजाय व्यापारिक कामकाज को आसान बनाने पर ध्यान केंद्रित ...और पढ़ें

HighLights
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को स्वचालित किया जाएगा, अधिकारियों का दखल कम होगा।
रिफंड दावे की पावती समय-सीमा 15 से घटाकर 10 दिन की गई।
10,000 रुपये से कम की रकम के लिए कोई नोटिस जारी नहीं होगा।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| पिछली बार जहां जीएसटी कटौती (GST Rate Cut) पर बड़े फैसले पर बात हुई वहीं इस बार 57वीं GST काउंसिल की बैठक में फोकस रेट स्ट्रक्चर तय करने से हटकर रोजमर्रा के बिजनेस कामकाज को आसान बनाने पर फोकस रहा और इसमें बड़े बदलाव देखने को मिले। बेहतर सिस्टम-मैचिंग और नेटवर्क एनालिसिस के आधार पर, काउंसिल ने रजिस्ट्रेशन, रिटर्न और रिफंड की प्रक्रियाओं को ऑटोमेट और आसान बनाने के लिए बड़े सुधार किए हैं।
GST काउंसिल ने क्या-क्या बदलाव किए
1. रजिस्ट्रेशन को ऑटोमेशन की से जोड़ना
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को ऑटोमेट किया जा रहा है। इससे अधिकारियों का दखल कम होगा और ऑनबोर्डिंग व कंप्लायंस अपडेट तेजी से होने का फायदा मिलेगा।
2. ऑटोमैटिक तरीके से मिलेगी मंजूरी
कम जोखिम वाले आवेदकों और उन लोगों के लिए, जिनका रजिस्टर्ड व्यक्तियों को मासिक आउटपुट टैक्स 2.5 लाख रुपये से कम है। उन्हें सिस्टम तीन दिनों के भीतर बिना किसी अधिकारी की भागीदारी के रजिस्ट्रेशन मंजूर करेगा। अभी, 61% रजिस्ट्रेशन अपने-आप प्रोसेस हो जाते हैं।
3. स्मार्ट एप्लीकेशन फॉर्म
रजिस्ट्रेशन फॉर्म एक गाइड की तरह काम करेगा, जो सिर्फ़ ज़रूरी फील्ड्स दिखाएगा और हर ज़रूरी डॉक्यूमेंट को उसके खास मकसद से साफ-साफ जोड़ेगा।
4. तुरंत बदलाव
ट्रेड नेम, डायरेक्टर या पार्टनर की जानकारी, या बिज़नेस की अतिरिक्त जगह के पते में बदलाव अब अपने-आप स्वीकार कर लिए जाएंगे। पहले सभी बदलाव आवेदनों में से 65% से ज्यादा इन्हीं आम बदलावों के होते थे।
रिटर्न से जुड़े क्या बदलाव होंगे
5. डेटा एंट्री की दिक्कतों को ठीक करना
यह मानते हुए कि रिटर्न में अंतर के लिए सिस्टम से भेजे गए नोटिस लगभग पूरी तरह से डेटा एंट्री की गलतियों के कारण होते हैं (जिससे रिकवरी रेट सिर्फ़ 0.08% रहता है), काउंसिल ने सुधार करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है।
6. इंटीग्रेटेड सुधार
अगर कोई सेलर पहले बताई गई संख्या को कम करता है, तो यह बदलाव अब सीधे उनके सेल्स स्टेटमेंट में किया जाएगा। इससे यह पक्का होता है कि एडजस्टमेंट अपने-आप उस बायर तक पहुंच जाए जिसने क्रेडिट का दावा किया था।
7. पुराने समय के बदलाव
टैक्सपेयर्स को पहले की अवधि के लिए सुधार करने की अनुमति होगी, जिसमें गलती से दर्ज किए गए बायर रजिस्ट्रेशन नंबर को ठीक करना भी शामिल है।
8. इनवॉइस मैनेजमेंट सिस्टम
टैक्स क्रेडिट का निपटान अब इनवॉइस मैनेजमेंट सिस्टम के ज़रिए होगा। सिर्फ़ वही चीज़ें बायर के रिटर्न में शामिल होंगी जिन्हें वे साफ़ तौर पर स्वीकार करेंगे।
रिफंड पर क्या बदलाव हुए
रिफंड की प्रक्रिया को काफी तेज किया जा रहा है। इसके लिए कस्टम और बैंकिंग सिस्टम से डेटा का इस्तेमाल करके फ़ॉर्म अपने-आप भरे जाएंगे और कम जोखिम वाले दावों के लिए मैन्युअल जांच की ज़रूरत नहीं होगी।
9. कम समय-सीमा
रिफंड के दावे की पावती (acknowledgement) देने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। अगर इस समय के अंदर पावती या कमी के बारे में कोई सूचना (deficiency memo) जारी नहीं की जाती है, तो दावा अपने-आप मंजूर मान लिया जाएगा।
10. सिस्टम से मंजूर होने वाले दावे
कम जोखिम वाले दावों के लिए, सिस्टम न कि कोई अधिकारी अपने-आप रिफ़ंड का 90% हिस्सा मंज़ूर कर देगा। पावती मिलने के तीन कामकाजी दिनों के अंदर आदेश जारी कर दिया जाएगा, जबकि अभी इसमें सात दिन लगते हैं।
11. कैश लेजर ऑटोमेशन
कैश लेजर में ज़्यादा बैलेंस के लिए रिफ़ंड 100% ऑटोमैटिक हो जाएगा, जिससे अधिकारियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
12. पहले से भरे हुए फॉर्म
रिफंड के दावे वाले फॉर्म में अब जानकारी पहले से भरी होगी; शिपिंग की जानकारी सीधे कस्टम से और पेमेंट की जानकारी बैंकिंग नेटवर्क से ली जाएगी।
Returns Made Simpler, Compliance Made Easier #57GSTCouncil https://t.co/zuJFzDBhS4
— CBIC (@cbic_india) October 8, 2026
13. कानूनी विवाद और उनका समाधान
अनुपालन (compliance) के अनावश्यक बोझ को कम करने के लिए, काउंसिल ने नोटिस जारी करने, धोखाधड़ी का आरोप लगाने और सुनवाई करने के तरीकों को एक जैसा (standardized) बना दिया है। खास बात यह है कि 10,000 रुपये से कम की रकम के लिए कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
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