GST Rules Change: पूरी तरह खत्म नहीं होगा गिरफ्तारी का प्रावधान, सरकार के इस बड़े फैसले से मचेगी हलचल? पूरी डिटेल
GST Council Meeting 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी परिषद की ...और पढ़ें
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अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति खत्म करने का प्रस्ताव, कारोबारियों को मिलेगी राहत
HighLights
जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्तियां खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया।
अभियोजन चलाने की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ होगी।
यह बदलाव 'करदाता पर भरोसे' के सिद्धांत पर आधारित है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| GST Council Meeting 2026: अगर आप भी एक कारोबारी हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार माल एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक,
जीएसटी परिषद के समक्ष जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियां खत्म करने का एक अहम प्रस्ताव रखा गया है। यह पूरा प्रस्ताव पूरी तरह से 'करदाता पर भरोसे' के सिद्धांत पर आधारित है, जिससे ईमानदार कारोबारियों को बिना किसी डर के अपना व्यापार आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
8 अक्टूबर को भारत मंडपम में होगी मीटिंग
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक आगामी आठ अक्टूबर को होने जा रही है। इस महत्वपूर्ण बैठक में जीएसटी अनुपालन व्यवस्था में बड़े बदलावों पर विचार किया जाएगा, जिसमें अधिकारियों की गिरफ्तारी के अधिकारों को समाप्त करना मुख्य एजेंडा है।
इसके साथ ही, अपराध को गैर-दंडनीय बनाने की प्रक्रिया के तहत अभियोजन चलाने की सीमा को 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर सीधे 5 करोड़ रुपए करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। माना जा रहा है कि जीएसटी कानून में ये सभी बड़े बदलाव साल 2027 की शुरुआत तक लागू किए जा सकते हैं।
अधिकारियों के पास नहीं थी गिरफ्तारी की शक्ति
सूत्रों का कहना है कि राज्यों को भी इस शक्ति को समाप्त करने का औचित्य समझ आएगा, क्योंकि उत्पाद शुल्क (एक्सरसाइज ड्यूटी) को छोड़कर किसी अन्य पुराने कर कानून में अधिकारियों के पास कभी भी गिरफ्तारी की ऐसी शक्ति नहीं थी।
वैट (VAT) या सेवा कर कानूनों के तहत कर अधिकारियों के पास यह अधिकार नहीं होता था। हालांकि, साल 2017 में जब जीएसटी लागू किया गया था, तब फर्जी बिलों के मामलों का पता लगाने के साधन बेहद सीमित थे और बिलों का डिजिटल मिलान संभव नहीं था। उस समय गड़बड़ियों को रोकने के लिए कड़े प्रावधान करने पड़े थे, जिसके तहत अधिकारियों को गिरफ्तारी की शक्ति दी गई थी।"
बिलों का मिलान मिनटों में हो रहा
लेकिन आज के समय में तकनीक बहुत आगे निकल चुकी है। आज डिजिटल सिस्टम और बेहतर तकनीकी व्यवस्था के जरिए बिलों का मिलान मिनटों में हो जाता है, जिससे सुरक्षा का उद्देश्य अब पूरी तरह प्रणाली के माध्यम से ही पूरा हो रहा है। यही वजह है कि अब यह महसूस किया जा रहा है कि कर अधिकारी का मुख्य काम सिर्फ कर संग्रह करना होना चाहिए, जबकि अपराधियों या जालसाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का पूरा जिम्मा कानून प्रवर्तन एजेंसियों का होना चाहिए।
पूरी तरह खत्म नहीं होगा गिरफ्तारी का प्रावधान
प्रस्ताव के अनुसार, जीएसटी कानून से गिरफ्तारी का प्रावधान पूरी तरह खत्म नहीं किया जा रहा है, बल्कि इसमें यह नियम जोड़ा जा रहा है कि अपराध साबित होने और अदालत के आदेश के बाद ही संबंधित आरोपी की गिरफ्तारी की जा सकेगी।
यानी अभियोजन शुरू होने से पहले की गई मनमानी गिरफ्तारी की प्रक्रिया को अब पूरी तरह समाप्त करने की बात कही गई है। हालांकि, एक-दो राज्य इस शक्ति को छोड़ने को लेकर थोड़े संवेदनशील हो सकते हैं, लेकिन सरकार को पूरी उम्मीद है कि सभी राज्य इस सकारात्मक और दूरदर्शी प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताएंगे।
