नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने कहा है कि जीएसटी लागू करन से भारत की मीडियम टर्म आर्थिक विकास दर आठ फीसद से ऊपर निकल सकती है। जीएसटी लागू करने से पूरे देश एक बाजार में तब्दील हो जाएगा। इससे वस्तु और सेवाओं का कारोबार तेजी से बढ़ेगा।

आइएमएफ ने भारत पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि जीएसटी लागू करने के तरीके पर चिंता भी जाहिर की है। जीएसटी लागू करने के तरीके और प्रगति में अभी भी कुछ अनिश्चितता है लेकिन इसे अपनाने से भारत की विकास दर आठ फीसद के ऊपर निकल जाएगी। हालांकि नोटबंदी के कारण मौजूदा वित्त वर्ष में विकास दर घटकर 6.6 फीसद रहने की संभावना जताई है। आइएमएफ ने माना कि नोटबंदी से अस्थाई रूप से आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी से उम्मीद से कहीं यादा फायदे होंगे। नीतिगत सुधारों पर आगे बढ़ने से भी विकास दर को बढ़ावा मिलेगा। भारत में जीडीपी के मुकाबले कर संग्रह जो कि करीब 17.5 फीसद है, को आइएमएफ ने काफी कम बताया। भारत जैसे विकासशील देशों में यह अनुपात कहीं बेहतर है। जीएसटी लागू करने में सबसे यादा प्राथमिकता विकास दर को दी जानी चाहिए।

डब्ल्यूटीओ का पहला बहुपक्षीय समझौता लागू

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का गठन होने के बाद पहला बहुपक्षीय व्यापार समझौता आज से लागू हो गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार यादा सुगम हो सकेगा। इसका लाभ खासकर विकासशील देशों को मिल सकता है। डब्ल्यूटीओ के डायरेक्टर जनरल रोबटरे अजेवेडो ने कहा कि इस समझौते को प्रभावी बनाने के लिए दो-तिहाई सदस्य देशों की सहमति मिल गई है। उन्होंने कहा कि समझौता पूरी तरह लागू होने के बाद वैश्विक कारोबार की लागत में खासी कमी आने का अनुमान है।

Posted By: Praveen Dwivedi

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