नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। 26 से अधिक वर्षों तक चेयरमैन की कुर्सी संभालने के बाद जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने सोमवार को जेट एयरवेज के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ उनकी पत्नी ने भी बोर्ड से इस्तीफा दिया है। इसके साथ ही कर्जदाताओं (बैंकों) का कंपनी पर नियंत्रण हो गया और उन्होंने कंपनी को तत्काल 1500 करोड़ रुपये की राहत देने का फैसल किया है।

नकदी संकट से जूझ रहे देश के पहले निजी पूर्ण सेवा वाहक के बोर्ड ने बैंकों के ऋण को इक्विटी में बदलने को भी मंजूरी दी है। साथ ही बैंक कंपनी में अपने दो सदस्यों को नामित भी कर पाएंगे। बैंकों के पास अब कंपनी में अधिकांश हिस्सेदारी होगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ऋणदाताओं (बैंकों) के फैसले पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि भारत को और अधिक विमान और एयरलाइंस की आवश्यकता है, " नहीं तो हवाई किराए में वृद्धि होगी"।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि अबू धाबी स्थित एतिहाद की जेट एयरवेज में 24 फीसद की हिस्सेदारी है, जो कि अब घटकर 12 फीसद की रह जाएगी। इस्तीफे के बाद अब नरेश गोयल कंपनी के चेयरमैन भी नहीं रहेंगे। कंपनी के 80 से अधिक विमान परिचालन से बाहर हो चुके हैं, जिनमें से 54 विमानों को लीज की किस्त नहीं चुका पाने के कारण खड़ा किया गया है। इतना ही नहीं कंपनी ने अप्रैल के अंत तक कम से कम 14 अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानें भी निलंबित कर दी हैं।

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