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ये तो बस शुरुआत है! RBI रेपो रेट में 3 बार और करेगा बढ़ोतरी, गोल्डमैन के अर्थशास्त्री की बड़ी भविष्यवाणी

By Jagran BusinessEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Fri, 09 Oct 2026 03:36 PM (IST)

गोल्डमैन सैश के अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने अनुमान लगाया है कि आरबीआई जून तक रेपो दरों में तीन बार और बढ़ोतरी करेगा, जिससे कुल 75 बेसिस पॉइंट्स की वृद्धि होगी।

आरबीआई जून तक रेपो रेट में तीन बार और बढ़ोतरी करेगा।

आरबीआई जून तक रेपो रेट में तीन बार और बढ़ोतरी करेगा।

HighLights

  1. आरबीआई जून तक रेपो रेट में तीन बार और बढ़ोतरी करेगा।

  2. अल नीनो 2027 में आर्थिक विकास और महंगाई के लिए खतरा।

  3. भारत की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 7% बनी रहने की उम्मीद है।

आईएएनएस, मुंबई। RBI Repo Rate: गोल्डमैन सैश के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता के अनुसार, उम्मीद है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जून तक ब्याज दरों में तीन बार और बढ़ोतरी करेगा, जिससे कुल बढ़ोतरी 75 बेसिस पॉइंट्स हो जाएगी। हालांकि, सेनगुप्ता का मानना है कि भारत लगभग 7% की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करता रहेगा।

अल नीनो को 2027 के लिए खतरा बताते हुए सेनगुप्ता ने कहा कि अल नीनो, जिसे कई वित्तीय बाजार भागीदारों ने अभी तक पूरी तरह से ध्यान में नहीं रखा है, 2023 की तुलना में 2027 के लिए ज्यादा बड़ा जोखिम है।

अल नीनो के असर पर क्या बोले अर्थशास्त्री

सेनगुप्ता ने उम्मीद जताई कि खरीफ (गर्मी) की फसल पर अल नीनो का असर बहुत कम होगा। साथ ही, उनका मानना है कि मौजूदा इन्वेंट्री लेवल निकट भविष्य में महंगाई के दबाव को रोकने में मदद करेंगे।

सेनगुप्ता ने कहा, "हमारी राय में, अल नीनो एक ऐसा जोखिम है जिसका असर बाद में अधिक दिखेगा। जलाशयों में पानी का कम स्तर रबी (सर्दियों) की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।"

इसके अलावा, 2027 तक स्टॉक का स्तर कम होने से महंगाई और बढ़ सकती है।

सेनगुप्ता ने कहा, "2027 में अल नीनो के कारण आर्थिक विकास पर बुरा असर पड़ सकता है और महंगाई बढ़ सकती है।"

अब कब-कब होगी रेपो रेट में वृद्धि?

रेपो रेट में वृद्धि को लेकर गोल्डमैन सैश के अर्थशास्त्री ने कहा कि आरबीआई दिसंबर, फरवरी और अप्रैल / जून में ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है।

गोल्डमैन सैश के अनुमानों के अनुसार, कच्चा तेल सबसे बड़ा जोखिम है और कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल से 95 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहेंगी।

सेनगुप्ता ने कहा, "अगर कच्चे तेल की कीमतें असल में 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर बनी रहती हैं, तो यह आर्थिक विकास और महंगाई के लिए एक बड़ी बाधा होगी।"

उन्होंने कहा कि इस साल कमाई में बढ़ोतरी 'मिड-टीन रेंज में रहने की उम्मीद है। विदेशी निवेश का प्रवाह कमजोर बना हुआ है। भारत से विदेशी निवेशक पैसे निकाल रहे हैं और अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में एआई से जुड़े मौकों पर ध्यान दे रहे हैं।

सेनगुप्ता ने कहा, "दुनिया एआई की ओर बढ़ रही है। इस समय हमारे सामने जो चुनौतियां हैं, वे मुख्य रूप से बाहरी हैं।"

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