'इंडिया नहीं इंग्लैंड करो, तभी खरीदेंगे', गुस्साए भारतीय ने ताला से ₹37294 करोड़ का साम्राज्य बना लिया था बदला!
अर्देशिर गोदरेज ने 'मेड इन इंडिया' के अपमान का बदला लेने के लिए सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट का व्यवसाय छोड़कर ताले बनाने ...और पढ़ें

गोदरेज इंडस्ट्रीज अब ₹37294 करोड़ का साम्राज्य है।
HighLights
अर्देशिर गोदरेज ने 'मेड इन इंडिया' अपमान पर व्यवसाय शुरू किया।
दुनिया का पहला स्प्रिंगलेस ताला, फायरप्रूफ तिजोरी बनाई।
गोदरेज इंडस्ट्रीज अब ₹37294 करोड़ का साम्राज्य है।
नई दिल्ली। एक समय था, जब भारत में अंग्रेजों का राज हुआ करता था। उस समय भी भारत में ऐसे-ऐसे कारोबारी थे, जो अंग्रेजों को सीधी टक्कर देते थे। आज हम एक ऐसे ही बिजनेसमैन की कहानी लेकर आए हैं, जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे क्या बदला लिया है। दरअसल, ये कहानी है एक वकील की जो आगे चलकर भारत का एक बड़ा बिजनेसमैन बना। कहानी 129 साल पुरानी है। जब एक यंग एंटरप्रेन्योर अपनी नई-नई कहानी लिखने की कोशिश कर रहा था। वकालत छोड़ उस एंटरप्रेन्योर ने सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट के बिजनेस शुरू किया था, लेकिन एक अंग्रेज ने उसके टूल पर लिखे मेड इन इंडिया का टैग हटाकर मेड इन इंग्लैंड लिखने को कहा था।
यही बात आज से करीब 130 साल पहले उस भारतीय के दिल में बैठ गई। और फिर जन्म हुआ एक ऐसे बिजनेस का जो आज भी भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है। ये कहानी किसी और कि नहीं गोदरेज इंडस्ट्रीज की शुरुआत करने वाले अर्देशिर गोदरेज की। आइए जानते हैं कि कैसे उन्होंने एक ब्रिटिशर की बात को दिल पर लिया और खड़ा कर दिया अरबों का साम्राज्य।
'मेड इन इंडिया का टैग' ने बदल दिय बिजनेस आइडिया
गोदरेज की आधिकारिक वेबसाइट https://www.godrejindustries.com/ पर मौजूद जानकारी के अनुसार अर्देशिर गोदरेज ने 1897 में अपने बिजनेस की शुरुआत की थी। वकालात का करियर छोड़कर उन्होंने बिजनेस में कदम रखा था। उस दौर में भारत में सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट बाहर से आयात होते थे। ऐसे में गोदरेज को लगा कि यह काम चल सकता है।
लेकिन जब उन्होंने इसे बेचने के लिए एक अंग्रेज से संपर्क किया तो उसने सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट में 'मेड इन इंडिया' के टैग को हटाकर 'मेड इन इंग्लैंड' का टैग लगाने को कहा। अंग्रेज ने यह भी कहा कि अगर तुम मेड इन इंडिया का टैग नहीं हटाओगे तो हम तुम्हारे प्रोडक्ट नहीं खरीदेंगे।
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इस बात से अर्देशिर गोदरेज को नागवार गुजरी। या यूं कह लें कि उन्होंने इसका बदला लेने की ठानी। अंग्रेज की इस बात को सुनकर उन्होंने अपना सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट का व्यापार बंद कर दिया और नए बिजनेस के बारे में सोचने लगे।
मुंबई में हो रही थीं चोरिया तो ताला बनाकर रख दी गोदरेज की नींव
अर्देशिर गोदरेज अपना सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट का बिजनेस बंद कर चुके थे। अब वह नए बिजनेस के बारे में सोच रहे थे। इसी दौरान मुंबई में खूब चोरियां हो रही थी। अंग्रेजी ताले टूट रहे थे। उस समय भारत में अंग्रेजी तालों का चलन था। मुंबई में हो रही चोरी से अर्देशिर गोदरेज को ताले का बिजनेस करने का आइडिया आया। और उन्होंने दुनिया का पहला पेटेंट स्प्रिंगलेस ताला बना दिया।
लेकिन ताला बनाने के बाद एक समस्या यह थी कि कोई उनका ताला खरीद नहीं रहा था। इसके लिए उन्होने न्यूजपेपेर में विज्ञापन छपवाए। पोस्टर प्रिंट कराकर रेलवे स्टेशन, रेस्टोरेंट और कई पब्लिक प्लेस पर लगाए कि अगर कोई उनके ताले को तोड़ देगा तो वह उन्हें पैसा देंगे। खास बात यह थी कि उनके ताले वाले विज्ञापन को ब्रिटिश हुकूमत के अंदर चलने वाले अंग्रेजी अखबारों ने छापा ही नहीं।
विज्ञापन देखने के बाद उनके ताले को तोड़ने के लिए हजारो लोग आए, लेकिन कोई उनका ताला तोड़ नहीं पाया। इसके बाद अर्देशिर गोदरेज का ताला मशहूर हो गया।
सेफ लॉक का कॉन्सेप्ट सीखने गए विदेश
ताला का बिजनेस चला तो अर्देशिर गोदरेज सेफ लॉक का कॉन्सेप्ट सीखने जर्मनी, फ्रांस और इंग्लैंड गए ताकि वो यह सीख सखे कि अंग्रेज अपने लिए सेफ लॉक कैसे बनाते हैं। यहां उन्हें पता चला कि सेफ लॉक बनाने के लिए ब्रिटिशर जो सेफ लॉक बनाते हैं वह सॉडस्ट (बुरादा) से लाइन होती है। इस सेफ लॉकर को ब्रिटिशर फायर प्रूफ बोलते थे।
इसके बाद अर्देशिर ने 1902 में भारत का पहला फायरप्रूफ सेफ लॉकर बनाया। और खास बात यह था कि 1908 में साइंटिफिक अमेरिका ने एक आर्टिकल छापा कि दुनिया की अधिकतर फायरप्रूफ सेफ लॉक ज्यादातर सेफ नहीं है।
इसके बाद गोदरेज ग्रुप के संस्थापक अर्देशिर गोदरेज ने अपने सेफ (तिजोरियों) की आग-रोधी क्षमताओं को साबित करने के लिए मुंबई (तब बॉम्बे) में एक सार्वजनिक प्रदर्शन किया। और खास बात रही कि उनके बनाए हुए सेफ नहीं जले, बल्कि दूसरी कंपनियों के सेफ जल गए। फिर यहां से उनके बनाए हुए सेफ लॉक (तिजोरियां) फेमस हो गए।
एक सदी से भी ज्यादा समय बाद भी, गोदरेज अभी भी ताले बनाता है। 2007 में, इसने भारत की पहली चिप वाली चाबी, मेक्ट्रोनिक डोर लॉक की, और यूनिक डुअल एक्सेस कंट्रोल पैडलॉक बनाया, यह पहला ऐसा ताला था जिसमें दो चाबियां थीं, जिससे मालिक को दूसरी चाबी को ब्लॉक करने या एक्सेस देने का अधिकार मिला।
यानी गोदरेज की कहानी एक ऐसे ताले से शुरू हुई जिसे खोला नहीं जा सकता था। अर्देशिर गोदरेज ने 1908 में दुनिया के पहले स्प्रिंग-रहित ताले का पेटेंट करवाया। उन्होंने गोदरेज को भारत और दुनिया में कई 'पहली बार' करने के लिए आगे बढ़ाया। वह संभावनाओं की सीमाओं को आगे बढ़ाना चाहते थे और पारंपरिक इंजीनियरिंग के तर्क को चुनौती देना चाहते थे।
साबुन से लेकर टाइपराटर तक सब बनाए
ताले की सफलता के बाद अर्देशिर गोदरेज ने अधिकतर बिजनेस में कदम रखा। साल 1918 में गोदरेज ने दुनिया का पहला वनस्पति तेल से बना साबुन तैयार किया। उस समय अधिकांश साबुन पशु वसा से बनाए जाते थे। ‘चाबी’ नाम से लॉन्च किए गए इस साबुन को स्वदेशी और अहिंसा का प्रतीक माना गया। इसकी गुणवत्ता की प्रशंसा गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी और एनी बेसेंट जैसे महान व्यक्तित्वों ने भी की।
गोदरेज ने भारत के औद्योगिक विकास में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए। वर्ष 1955 में कंपनी ने भारत का पहला स्वदेशी टाइपराइटर ‘गोदरेज प्राइमा’ बनाया, जिसने विदेशी मशीनों की जगह ली। 1951 के पहले आम चुनावों के लिए कंपनी ने लगभग 17 लाख बैलेट बॉक्स भी तैयार किए।
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समय के साथ गोदरेज ने इंजीनियरिंग, घरेलू उपकरण, सुरक्षा समाधान, उपभोक्ता उत्पाद, कृषि उत्पाद और रियल एस्टेट जैसे कई क्षेत्रों में अपना कारोबार फैलाया। कंपनी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिलकर चंद्रयान और मंगलयान मिशनों के लिए भी महत्वपूर्ण उपकरण और तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
एक छोटे ताले के व्यवसाय से शुरू होकर गोदरेज आज भारत के सबसे भरोसेमंद और विविध व्यवसाय वाले समूहों में शामिल है, जिसकी विरासत 100 वर्षों से अधिक पुरानी है।
दो हिस्सों बंट चुका है गोदरेज का बिजनेस
आज के समय गोदरेज इंडस्ट्रीज दो हिस्सों में बंटकर गोदरेज एंटरप्राइजेज और गोदरेज इंडस्ट्रीज के रूप में चल रही है। 2024 में हुए पुनर्गठन के बाद, गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप (GEG) का नेतृत्व जमशेद गोदरेज चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर कर रहे हैं, जबकि नायरिका होलकर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं।
पिरोजशा गोदरेज 14 अगस्त, 2026 को गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप (GIG) के चेयरपर्सन बनने जा रहे हैं। वे अपने चाचा, नादिर गोदरेज की जगह लेंगे। नादिर गोदरेज 75 साल की उम्र में रिटायर हो जाएंगे और चेयरमैन एमेरिटस बन जाएँगे। यह बदलाव 2024 में हुए पारिवारिक बंटवारे के बाद हो रहा है।
गोदरेज इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप (Godrej Industries Ltd Market Cap) 37294 करोड़ रुपये है।
भारत की आजादी के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में खूब किया दान
अर्देशिर गोदरेज ने सिर्फ बिजनेस के दम पर ही नहीं, बल्कि अपने मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा वह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को देकर खूब नाम कमाया। उन्होंने 'तिलक स्वराज फंड' जैसे कार्यों में योगदान दिया। ऐसा उन्होंने तब भी किया जब उन्हें चेतावनी दी गई थी कि ब्रिटिश शासन के तहत इससे उनके कारोबार को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन वे अपने फैसले पर अडिग रहे।
Godrej Industries की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ट्रस्टीशिप की यह भावना 1970 के दशक में स्थापित परोपकारी ट्रस्टों के माध्यम से जारी रही, और आज भी 'गोदरेज फाउंडेशन' के पास ग्रुप की लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी के रूप में जीवित है।
तो यह थी भारत के महान बिजनेस अर्देशिर गोदरेज की कहानी। इसी तरह अन्य बिजनेसमैन की कहानियां आप हमारे जागरण बिजनेस पर पढ़ सकते हैं। और अगर आप चाहते हैं कि हम किसी और बिजनेसमैन पर स्टोरी करें तो आप हमें अपना सुझाव business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।
