कच्चे तेल, फेड दर और बांड रिटर्न ने बदला वैश्विक निवेश का परिदृश्य; बाजार से लेकर सोने तक में गिरावट
पश्चिम एशिया संकट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी फेडरल बैंक की ब्याज दर वृद्धि और आकर्षक अमेरिकी बांड रिटर्न ...और पढ़ें

बढ़ते कच्चे तेल, फेड दर और अमेरिकी बांड रिटर्न से निवेश का समीकरण बदला
HighLights
पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल।
अमेरिकी फेडरल बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाईं, बांड रिटर्न आकर्षक हुए।
भारतीय शेयर बाजार से $2 अरब विदेशी निवेश निकला, सोना भी गिरा।
राजीव कुमार (जागरण ब्यूरो) नई दिल्ली| पश्चिम एशिया में दोबारा संकट शुरू होने के बाद पिछले एक माह में निवेश का पूरा समीकरण बदलता दिख रहा है। होर्मुज के फिर से बाधित होने, सऊदी पर हूती हमले और अमेरिका-ईरान के बीच समझौता का कोई आसार नहीं दिखने से कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे है। एक माह पहले तक 75-80 डालर प्रति बैरल के पास पहुंच जाने वाला कच्चा तेल अब 105 डालर प्रति बैरल के पास है और वैश्विक हालात को देखते हुए इसमें कमी की उम्मीद नहीं दिख रही है।
जानकारों का कहना है कि इस तेजी को देखते हुए विदेशी निवेशक कच्चे तेल की ओर मुखातिब हो गए हैं। इस बीच अमेरिका के फेडरल बैंक की तरफ से सितंबर में बैंक दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर दी गई जिससे विदेशी निवेशकों को अमेरिका में निवेश करना अधिक फायदेमंद दिख रहा है।
ईरान के साथ युद्ध के कारण महंगाई और आर्थिक परेशानी से घिरे अमेरिका ने अपने बांड को आकर्षक बनाने के लिए वर्ष 2007 के बाद अब तक का सबसे अधिक 5.25 प्रतिशत का रिटर्न दे रहा है। इससे भी विदेशी निवेशकों का रुख अमेरिका की तरफ दिख रहा है। इस कारण सिर्फ सितंबर माह में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों ने दो अरब डालर से अधिक की बिकवाली की है।
सितंबर के आरंभ में 77,000 अंक पर टिका सेंसेक्स मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ 72,500 अंक के पास आ गया।
कई वित्तीय कंपनियों के बोर्ड सदस्य रह चुके और बाजार विश्लेषक आशुतोष बिश्नोई का मानना है कि वैश्विक रूप से जिस प्रकार से अनिश्चितता का माहौल है, उसे देखते हुए शेयर बाजार में रौनक की उम्मीद नहीं दिख रही है। अभी के माहौल में विदेशी निवेशक भारत के बाजार में क्यों लौटेंगे।
जानकारों का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार अब भी विदेशी निवेशकों से पूरी तरह प्रभावित होता है। भारत की घरेलू स्थिति के मजबूत होने के बाद भी उन्हें भारतीय कंपनी से अधिक फायदा डालर वाले देश में दिख रहा है।
एलकेपी सिक्युरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक फेड रेट और अमेरिकी बांड के रिटर्न में बढ़ोतरी से सोने में भी पिछले 10 दिनों से बिकवाली हो रही है। इससे सोने के भाव में पिछले 10 दिनों में प्रति 10 ग्राम 10000 रुपए तक की गिरावट हो चुकी है।
उनका कहना है कि वैश्विक हालात को देखते हुए सोने के दाम अभी ऊपर-नीचे होते रहेंगे और अगले कुछ दिनों में सोना 1.44 से लेकर 1.49 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के बीच रहेगा। सोने के दाम में नरमी से ज्वैलरी के रिटेल दुकानदारों को अपने कारोबार में बढ़ोतरी की उम्मीद दिख रही है। उन्होंने बताया कि सोने में नरमी जारी रही तो त्योहारी सीजन में सोने की खरीदारी निश्चित रूप से होगी।
