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G20 में दरार! आम सहमति बनाने में नाकाम रहे दिग्गज देश, पीयूष गोयल ने बताई वजह

By IANSEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Sat, 03 Oct 2026 01:06 PM (IST)

जी20 उद्योग मंत्रियों की मिल्वौकी बैठक में कुछ देशों के मतभेदों के कारण अंतिम दस्तावेज पर सहमति नहीं बन पाई। ...और पढ़ें

जी20 उद्योग मंत्रियों की मिल्वौकी बैठक में नहीं बनी सहमति।

जी20 उद्योग मंत्रियों की मिल्वौकी बैठक में नहीं बनी सहमति।

HighLights

  1. जी20 उद्योग मंत्रियों की मिल्वौकी बैठक में नहीं बनी सहमति।

  2. पीयूष गोयल ने मतभेदों के बावजूद बातचीत को सार्थक बताया।

  3. जबरन मजदूरी, डब्ल्यूटीओ के भविष्य पर हुई अहम चर्चा।

एजेंसी, शिकागो। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कुछ देशों के बीच मतभेदों के कारण जी20 उद्योग मंत्रियों की मिल्वौकी में हुई बैठक में किसी अंतिम दस्तावेज पर सहमति नहीं बन पाई। हालांकि, उन्होंने बातचीत को सार्थक बताया और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहमति वाले क्षेत्रों की ओर भी इशारा किया।

मिल्वौकी में जी20 उद्योग मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के बाद शिकागो में अमेरिकी भारतीय समुदाय फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में गोयल ने कहा कि मंत्रियों ने जबरन मजदूरी, वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के भविष्य और मैन्युफैक्चरिंग पर सरकार से मदद पाने वाली बड़ी प्रोडक्शन क्षमताओं के असर पर चर्चा की।

पीयूष गोयल ने क्या कहा?

गोयल ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ बातचीत के दौरान कहा, "हमारी बहुत अच्छी चर्चा हुई। मुझे लगता है कि बातचीत का यह दौर बहुत फायदेमंद रहा।"

उन्होंने कहा, "बेशक, कुछ दूसरे देशों के साथ मतभेदों के कारण, वे कोई नतीजा बताने वाला दस्तावेज (आउटकम डॉक्यूमेंट) तैयार नहीं कर पाए।"

हालांकि गोयल ने उन देशों का नाम नहीं बताया जिनकी वजह से मतभेद हुए और न ही उन मुद्दों के बारे में साफ तौर पर बताया जिनकी वजह से किसी नतीजे वाले दस्तावेज पर सहमति नहीं बन पाई।

उन्होंने कहा कि जी20 की अमेरिकी अध्यक्षता के दौरान उठाए गए मुद्दों पर कई देशों के बीच सहमति बनी। गोयल ने यह भी कहा कि मंत्रियों ने जबरदस्ती मजदूरी से बने सामान के व्यापार और इस पर मिलकर कदम उठाने की जरूरत पर चर्चा की। उन्होंने कहा, "हम सभी इस बात पर सहमत हुए कि जी20 देशों को मिलकर ऐसे सामान के आयात का विरोध करना चाहिए जो जबरदस्ती मजदूरी से बनाए गए हों।"

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि चर्चा में डब्ल्यूटीओ के भविष्य पर भी बात हुई, जिसे उन्होंने "भारी दबाव" में बताया।

गोयल ने कहा कि इस बात पर चर्चा हुई कि "सरकारी मदद से अलग-अलग समय पर बनी बहुत बड़ी प्रोडक्शन क्षमता वाले कुछ इलाकों को उन देशों में मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान नहीं पहुंचाने दिया जाना चाहिए, जहां निष्पक्ष व्यापार और ईमानदारी से कारोबार होता है, जैसे कि अमेरिका, यूरोप या भारत।"

मियामी में होने वाले जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा, "जहां तक मियामी में होने वाले शिखर सम्मेलन की बात है, तो इस पर फैसला दोनों नेताओं को करना है।"

मिल्वौकी बैठक के बाद गोयल शिकागो गए और शुक्रवार का दिन अमेरिकी व्यवसायों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ बातचीत में बिताया।

उन्होंने बताया कि दिन भर में उन्होंने अमेरिकी व्यापार संगठनों के जरिए अलग-अलग आकार के व्यवसायों को देखा और बड़े निवेशकों के साथ कई आमने-सामने की बैठकें कीं। उन्होंने शिकागो में हुई बातचीत का इस्तेमाल भारतीय-अमेरिकी व्यवसायों को भारत में निवेश बढ़ाने और देश के आर्थिक विस्तार में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित करने के लिए भी किया।

क्या है जी20?

बता दें कि जी20 दुनिया की बड़ी विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मुद्दों पर तालमेल बिठाने के लिए एक मंच का काम करता है। इस समूह के भीतर व्यापार पर चर्चा के दौरान औद्योगिक नीति, सब्सिडी, सप्लाई चेन और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के कामकाज को लेकर मतभेदों से निपटना लगातार जरूरी हो गया है।

2026 में जी20 की अध्यक्षता अमेरिका के पास है और नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले होने वाली बैठकों में मिल्वौकी में व्यापार मंत्रियों की बैठक भी शामिल है। व्यापार और समुदाय से जुड़े कार्यक्रमों के लिए शिकागो जाने से पहले, गोयल ने व्यापार मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

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