सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। बढ़ती आबादी की खाद्य सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए सरकार की बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने की परियोजना परवान चढ़ने लगी है। लगभग तीन करोड़ हेक्टेयर भूमि को उर्वरा बनाने से वहां फसलें लहलहाने लगी हैं। वर्ष 2030 तक देश में बंजर, परती व अनुपजाऊ पड़ी जमीन में से 5.5 करोड़ हेक्टेयर भूमि को खेती लायक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के साथ ही देश में प्रति व्यक्ति खेती वाली जमीन 0.24 हेक्टेयर से बढ़कर 0.36 हेक्टेयर यानी डेढ़ गुना हो जाएगी।

बंजर से उपजाऊ बनाने की इस योजना से 35 लाख किसानों को सीधा फायदा होगा। योजना की पूर्ण सफलता के बाद खाद्यान्न की पैदावार दोगुना हो जाने का अनुमान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप देश की बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने को लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय का भूमि संसाधन विभाग ने परियोजना को रफ्तार दी है। देश की बंजर व परती जमीन को चिन्हित कर 8,213 क्लस्टर में बांट दिया गया है। प्रत्येक क्लस्टर में औसतन 5,000 हेक्टेयर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये आवंटन का प्रविधान है।

कुल 4,000 करोड़ रुपए की इस परियोजना में स्थानीय लोगों की शत प्रतिशत हिस्सेदारी होती है।इस बारे में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह का कहना है कि खेती योग्य भूमि संसाधन को बढ़ाने की इस परियोजना से एक लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हो रहा है। स्थानीय स्तर पर जहां लोगों को काम मिलता है, वहीं किसानों की आमदनी में 25 फीसद की बढ़त दर्ज की गई है।

इस वर्ष सितंबर तक कुल 2.9 करोड़ हेक्टेयर जमीन उपजाऊ बन जाएगी।¨सह का कहना है कि जिन जमीनों पर एक फसल की खेती होती है, उन्हें दो फसली अथवा बहुफसली बनाया जा सकता है। ऐसी जमीनों में हरी घास अथवा चारे की खेती की जा रही है, जिसमे 15 से 20 फीसद की उत्पादकता बढ़ी है। बंजर जमीनों को उपजाऊ बनाने की योजना में स्थानीय स्वयं सहायता समूह, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की पूर्ण सहभागिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Edited By: Nitesh