नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर सोने की मांग में भारी इजाफा हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ओर से जारी की गई ताजा रिपोर्ट बताती है कि साल 2016 की दूसरी तिमाही में सोने की मांग 15 फीसदी बढ़कर 1050 टन रही है। जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह मांग 910 टन रही थी।

क्या कहती है रिपोर्ट:

रिपोर्ट बताती है कि इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह सोने में निवेश मांग का बढ़ना है। राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों ने सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रुप में चुना है। हालांकि भारत में सोने की मांग इस साल दूसरी तिमाही में 18 प्रतिशत घटकर 131 टन रह गई। इसका कारण कीमत में बढ़ोतरी, सरकारी नियमों और जौहरियों की हड़ताल मानी जा रही है।

भारत में अगर सोने में निवेश की बात की जाए तो लोग सोने के गहने खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। हालांकि इसके अलावा भी सोने में निवेश के तमाम ऐसे विकल्प हैं जिनमें निवेश कर कोई भी उपभोक्ता अच्छा रिटर्न पा सकता है। जागरण डॉट कॉम अपने इस आर्टिकल में सोने में निवेश करने के पांच विकल्पों के बारे में बता रहा है।

1. सोने के गहने खरीदना:

सोने के गहने खरीदना निवेश करने का सबसे पुराना तरीका है। लेकिन यदि निवेश के लिहाज से कोई उपभोक्ता सोने के गहने खरीदता है तो उसे दोहरा नुकसान होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि गहने खरीदते समय ज्वैलर्स मेकिंग और वेस्टेज चार्जेस जोड़ देते हैं और जब इन्हीं गहनों को ग्राहक बाजार में वापस बेचने जाते हैं तब ज्वैलर्स मेंकिग चार्जेस और वेस्टेज को काटकर इसकी कीमत लगाते हैं। ऐसे में निवेश पर मिलने वाला रिटर्न कम हो जाता है। साथ ही यदि हॉलमार्क का निशान इस ज्वैलरी पर न हो तो इसकी शुद्धता पर भी संदेह बना रहता है।

2. सोने की छड़ या सिक्के खरीदना:

फिजिकल गोल्ड में निवेश करने का एक और तरीका छड़ और सिक्कों में निवेश करने का है। बैंक और ज्वैलरी शॉप से कोई भी उपभोक्ता इन्हे खरीद सकता है। आम तौर पर यह 5 ग्राम, 10 ग्राम और 50 ग्राम वजन में उपलब्ध होते हैं। इस विकल्प के जरिए अगर आप सोने में निवेश करते हैं तो आपको गहनों की तुलना में अधिक शुद्धता मिलती है। इसपर मिलने वाला रिटर्न गहनों की तुलना में इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि इसमें कोई भी मेकिंग या डिजायन का चार्ज नहीं होता है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर भविष्य में कभी भी आप इसके गहने बनवा सकते हैं।

3. गोल्ड ETF (एक्सचेंज ट्रेडिड फंड्स):

गोल्ड ETF के जरिए आप गोल्ड में ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं। ऑनलाइन गोल्ड खरीदने के लिए आपके पास एक डीमैट अकाउंट होना अनिवार्य है। इस माध्यम से कोई भी उपभोक्ता कम से कम 1 ग्राम सोना खरीद सकता है। इसे खरीदने में केवल ब्रोकर और डीमैट अकाउंट के चार्जेस लगते है। जब उपभोक्ता बेचना चाहें डीमैट की मदद से ही घर बैठे बेच सकते हैं।

4. गोल्ड फंड्स (म्युचुअल फंड्स):

ऑनलाइन गोल्ड में निवेश करने का एक और तरीका म्युचुअल फंड्स भी है। इसमें आप न्यूनतम 1000 रुपए का भी निवेश कर सकते हैं। तमाम कंपनियां गोल्ड फंड चलाती हैं, जिनमें निवेश करके कोई भी व्यक्ति गोल्ड में ऑनलाइन निवेश कर सकता है।

5. सॉवरन गोल्ड बॉण्ड स्कीम:

सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड स्कीम को गोल्ड की फिजिकल डिमांड को कम करने के उद्देश्य से लॉन्च किया था। इसमें खरीदारी बॉन्ड्स के रूप में होती है। कीमतों में उतार चढ़ाव के हिसाब से निवेश पर ब्याज दिया जाता है। बॉन्ड का गुणांक 5, 20, 50 और 100 ग्राम के गोल्ड में होता है। इस स्कीम के अंतर्गत बॉन्ड्स को बैंक/एनबीएफसी/पोस्ट ऑफिस/ नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) एजेंट्स के जरिए खरीदा या बेचा जा सकता है। भारत में गोल्ड में निवेश करने का यह एक और माध्यम है।

उपरोक्त सोने में निवेश करने के पांच तरीके हैं जिनके अपने फायदे और सीमाएं हैं। उपभोक्ता को यह याद रखना चाहिए कि वह सोना इस्तेमाल के लिए खरीद रहा है या निवेश के लिए। निवेश के लिए गोल्ड खरीदते समय फिजिकल गोल्ड की बजाय ऑनलाइन गोल्ड खरीदना कई तरह से फायदेमंद रहता है। सोने में कितना और कैसे निवेश करें इसके लिए उपभोक्ता को अपने वित्तीय सलाहकार की मदद लेनी चाहिए।

Posted By: Surbhi Jain

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