नई दिल्ली (पीटीआई)। देश के बैंकों ने दूरसंचार क्षेत्र को बहुत अधिक कर्ज नहीं दिया है, लेकिन डिफॉल्ट से बैंकों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है। प्रमुख टेलिकॉम कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस के ताजा नकदी संकट के बीच यह बात वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने कही है। एजेंसी ने यह बात अपने एक नोट के जरिए कही है।

क्या कहा फिच ने:

फिच ने अपने एक नोट में कहा, “संकट में फंसी दूरसंचार कंपनियों को भारतीय बैंकों का कर्ज इतना अधिक नहीं है कि इससे प्रणालीगत जोखिम की स्थिति पैदा हो, लेकिन किसी तरह के डिफॉल्ट से बैंकों की समस्या बढ़ सकती और उनका बहीखाता कमजोर हो सकता है।” फिच ने कहा कि देश की दूरसंचार कंपनियों की वित्तीय स्थिति बीते साल रिलायंस जियो की टेलिकॉम सेक्टर में एंट्री तथा 4जी सेवाओं के लिए नेटवर्क पर निवेश की वजह से खराब हुई है।

रिजर्व बैंक के मुताबिक दूरसंचार कंपनियों पर बैंकों का बकाया कर्ज 91,300 करोड़ रुपये या 14 अरब डॉलर है। यह कुल बैंक ऋण (कर्ज) का 1.4 फीसद है। अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस पर बैंकों का 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और वह इसे चुकाने के लिए संघर्ष कर रही है।

गौरतलब है कि अनिल अंबानी के अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली आर कॉम ने हाल ही में वादा किया है कि वो अपने कर्जदारों को आगामी सितंबर तक 25,000 करोड़ का बकाया लौटा देगी। इससे पहले आर कॉम पर करीब 10 बैंकों की किश्त न चुका पाने का आरोप लगा था।

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Posted By: Praveen Dwivedi

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