नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। निजी हितों को ध्यान में रखते हुए आईसीआईसीआई बैंक की ओर से जारी किए गए लोन मामले की जांच, जिसने बैंक प्रशासन पर काफी सारे सवाल खड़े कर दिए हैं और उसने बैंक के लिए साख का संकट पैदा कर दिया है। यह बात वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने कही है।

रेटिंग एजेंसी की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि फिच इस पूरे मामले पर पैनी नजर रखे हुए है और अगर बैंक की शाख एवं उसके वित्तीय प्रोफाइल का जोखिम बढ़ता है रेटिंग के संबंध में उचित कार्यवाही की जाएगी। आईसीआईसीआई बैंक पर लगा यह आरोप वीडियोकॉन ग्रुप को दिए गए 500 मिलियन डॉलर के लोन से जुड़ा हुआ है, जिनके नियंत्रित शेयरधारक ने आईसीआईसीआई के सीईओ चंदा कोचर के पति के साथ मिलकर एक अलग कंपनी की स्थापना की है। इस लोन का एक बड़ा हिस्स अब एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्तियां) बन चुका है।

हालांकि बैंक ने तमाम आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि लोन बैंक के सभी क्रेडिट स्टैंडर्ड के अनुरूप ही जारी किया गया था और इसे 20 से अधिक बैंकों के एक कंसोर्टियम के हिस्से के रूप में विस्तारित किया गया था। साथ ही बैंक ने जोर देकर कहा कि उसने कंसोर्टियम के बाहर उधारकर्ता समूह को कोई क्रेडिट नहीं दिया है।

चंदा कोचर के पद पर बने रहने को लेकर ICICI बैंक के कुछ निदेशकों को एतराज

आईसीआईसीआई बैंक का बोर्ड जिसने दो हफ्ते पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर पर पूरा भरोसा जताया था, अब उनके मामले को लेकर दो खेमों में बंट गया है। इन खेमों में मतभेद इस विषय को लेकर है कि क्या विडियोकॉन ग्रुप को दिए गए लोन मामले पर आरोपों की जांच प्रक्रिया के दौरान चंदा कोचर को पद पर बने रहना चाहिए या नहीं।

Posted By: Praveen Dwivedi

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