नई दिल्ली। रेटिंग एजेंसी फिच ने वित्त वर्ष 2017 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.4 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है। ग्रोथ रेट का अनुमान घटाने के पीछे मुख्य वजह सरकार की ओर से लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद अर्थव्यवस्था में हुई नकदी की कमी को बताया गया है। फिच की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के चलते 2016 की चौथी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। नोटबंदी के बाद 1000 और 500 के सभी नोटों को बदला जाना है, जो कुल करंसी के 86 फीसदी के बराबर है।

वित्त वर्ष 2017 के साथ साथ 2018 के लिए भी ग्रोथ का अनुमान घटाया है। फिच के मुताबिक वित्त वर्ष 2018 के लिए ग्रोथ का अनुमान 8 फीसदी से घटाकर 7.7 फीसदी कर दिया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2015 से अब तक रिजर्व बैंक की ओर से अब तक नीतिगत दर में कुल 150 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है। रिजर्व बैंक की ओर की गई कटौती से अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा।

फिच को यह उम्मीद है कि आने वाले दिनों में नकदी की समस्या में कुछ सुधार आएगा। लेकिन मध्यम अवधि में जीडीपी ग्रोथ पर नोटबंदी का कितना असर पड़ेगा यह निश्चित नहीं है। लेकिन इसके वृहद प्रभाव होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि लोग अभी भी तमाम तरह के बिल और सोना खरीदने जैसे विकल्पों में अपने बड़े नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह उम्मीद जताई गई है कि जल्द ही असंगठित क्षेत्रों में कामकाज सुचारू हो जाएगा।

Posted By: Surbhi Jain

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