नई दिल्ली, पीटीआइ। रेटिंग एजेंसी फिच ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटा दिया है। फिच ने इसे घटाकर 5.5 फीसद कर दिया है। गुरुवार को फिच ने कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में संकट और कर्ज देने में कमी की वजह से आर्थिक वृद्धि दर छह साल के न्यूनतम स्तर पर आ पहुंच गई है। फिच ने जून में 2019-20 के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.6 फीसद रहने का अनुमान जताया था। एजेंसी ने कंपनी कर की दरों में कटौती समेत सरकार के हाल के उपायों से आर्थिक वृद्धि में तेजी की उम्मीद जताई।

बता दें कि रिजर्व बैंक ने इसी महीने 6.1 फीसद आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान जताया था। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष (2020-21) में जीडीपी वृद्धि दर 6.2 फीसद और उसके अगले वित्त वर्ष में 6.7 फीसद रह सकती है। गौरतलब है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में घटकर 5 फीसद पर आ गई जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह 8 फीसद थी।

फिच के अनुसार, घरेलू खर्च के साथ विदेशों से भी मांग कमजोर हो रही है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में संकट के कारण कर्ज उपलब्धता में कमी से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मालूम हो कि अक्टूबर की शुरूआत में मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर अनुमान 6.2 फीसद से घटाकर 5.8 फीसद कर दिया था। मूडीज ने अर्थव्यवस्था में नरमी के पीछे दीर्घकालिक कारण बताए।

Posted By: Nitesh

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