नई दिल्ली, पीटीआइ। कोरोनावायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन का व्यापक असर इकोनॉमी पर देखने को मिला है। अब राजकोषीय घाटे के आंकड़े को ही ले लीजिए। देश का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले दो माह में ही बढ़कर 4.66 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमानों के 58.6 फीसद पर पहुंच गया। लॉकडाउन की वजह से कर संग्रह में आई कमी के कारण रोजकोषीय घाटे में यह बढ़ोत्तरी देखने को मिली। पिछले साल अप्रैल-मई में यह आंकड़ा 52 फीसद पर था।

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सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे को 7.96 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी के 3.5 फीसद पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा एक फरवरी को पेश बजट में इसका एलान किया गया था। 

हालांकि, कोरोनावायरस महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था में मची उथल-पुथल को देखते हुए इन आंकड़ों में बड़ा संशोधन देखने को मिल सकता है।  

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स के आंकड़ों के मुताबिक मई के आखिर में राजकोषीय घाटा 4,66,343 करोड़ रुपये पर रहा। अप्रैल के आखिर में राजकोषीय घाटा बजट अनुमानों के 35.1 फीसद पर था।  

वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.6 फीसद पर पहुंच गया था, जो सात साल का उच्चतम स्तर रहा था। पिछले वित्त वर्ष में राजस्व में कमी और मार्च के आखिर में कोरोनावायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के चलते राजकोषीय घाटा लक्ष्य से काफी आगे निकल गया।  

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इन आंकड़ों पर इकरा की उपाध्यक्ष अदिति नायर ने कहा कि राजस्व संग्रह में भारी कमी और कुल खर्च में मामूली गिरावट के बीच चालू वित्त वर्ष के पहले दो माह में राजकोषीय घाटा बढ़कर 4.7 लाख करोड़ तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि यह वित्त वर्ष निश्चित रूप से काफी मुश्किल रहने वाला है। 

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