देश के बफर स्टॉक में लिमिट से 3 गुना अधिक अनाज, 1.9 करोड़ टन चावल का आना बाकी! खाद्य सब्सिडी की चिंता के बीच FCI लेगा लोन?
भारतीय खाद्य निगम के पास जरूरत से ज्यादा अनाज जमा होने से सरकार पर खाद्य सब्सिडी का बोझ बढ़ रहा ...और पढ़ें

देश में खाद्य सब्सिडी बढ़ने का अनुमान
HighLights
FCI के पास बफर स्टॉक से 2.74 गुना अधिक अनाज।
खाद्य सब्सिडी का खर्च ₹2.47 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान।
अनाज के रखरखाव और वितरण लागत में लगातार वृद्धि।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अल-नीनो और ज्योपॉलिटिकल उथल-पुथल के बीच जहां दुनिया में फूड सिक्योरिटी की चर्चा तेज है, वहीं भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास जरूरत से ज्यादा अनाज जमा होने के कारण केंद्र सरकार पर खाद्य सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में खाद्य सब्सिडी का कुल खर्च बजट में तय ₹2.27 लाख करोड़ के मुकाबले बढ़कर ₹2.47 लाख करोड़ से अधिक हो सकता है। इसकी प्रमुख वजह सरकारी गोदामों में अनाज का बढ़ता भंडार और उसके स्टोरेज में रखरखाव पर होने वाला खर्च है।
FCI के पास फिलहाल 84.38 मिलियन टन यानी 8.438 करोड़ टन अनाज का स्टॉक है। यह एक अक्टूबर के लिए निर्धारित 30.77 मिलियन टन के बफर स्टॉक का करीब 2.74 गुना है। इसमें 3.81 करोड़ टन चावल और 4.61 करोड़ टन गेहूं शामिल हैं। इसके अलावा, मिलों से करीब 1.9 करोड़ टन चावल मिलना अभी बाकी है।
खाद्य सब्सिडी का खर्च बढ़ने की आशंका
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में FCI के माध्यम से खाद्य सब्सिडी के लिए ₹1.52 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसमें से वित्त मंत्रालय अब तक ₹83,000 करोड़ जारी कर चुका है, जो कुल आवंटन का लगभग 54% हिस्सा है। इसके अलावा सरकार ने FCI को नकदी की जरूरत पूरी करने के लिए ₹50,000 करोड़ का 'वेज एंड मीन्स एडवांस' भी दिया है। यह अस्थायी वित्तीय सहायता है, जिसे चालू वित्त वर्ष के अंत तक FCI के आवंटन में अर्जस्ट किया जाना है।
ऐसे में अगर अनाज का भंडार बढ़ता रहता है और उसे रखने की लागत में इजाफा होता है, तो सरकार को निर्धारित बजट से एक्स्ट्रा पैसा देना पड़ सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में खाद्य सब्सिडी का कुल खर्च ₹2.27 लाख करोड़ रहा था, जिसमें से ₹1.69 लाख करोड़ FCI के माध्यम से खर्च किए गए थे।
चावल और गेहूं की लागत में भी बढ़ोतरी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), ट्रांसपोर्टिंग, स्टोरेज और दूसरे खर्च बढ़ने से सरकार के लिए अनाज की आर्थिक लागत भी बढ़ रही है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में चावल की आर्थिक लागत ₹43.91 प्रति किलो और गेहूं की ₹31.45 प्रति किलो होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह लागत क्रमशः ₹42.11 और ₹29.68 प्रति किलो थी।
आर्थिक लागत में अनाज की खरीद के साथ उसे संभालकर रखने और वितरण से जुड़े खर्च भी शामिल होते हैं। इसलिए जब सरकारी स्टॉक लंबे समय तक जमा रहता है, तो उसके रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च होता है।
80 करोड़ से अधिक लोगों को मिलता है मुफ्त राशन
खाद्य सब्सिडी का बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत मुफ्त राशन उपलब्ध कराने में खर्च होता है। इस योजना के तहत करीब 81 करोड़ लोगों को हर महीने प्रति व्यक्ति 5 किलो निर्धारित अनाज मुफ्त दिया जा रहा है। योजना को वर्ष 2028 के अंत तक बढ़ाया गया है। इसके लिए सरकारी खजाने पर अनुमानित ₹11.8 लाख करोड़ का खर्च आएगा।
FCI हर साल मुफ्त राशन योजना के तहत करीब 3.6 से 3.8 करोड़ टन चावल और 1.8 से 2 करोड़ टन गेहूं वितरित करता है। दूसरी ओर, सरकारी खरीद कई वर्षों से 8 से 8.5 करोड़ टन के दायरे में बनी हुई है। खरीद और वितरण के बीच इस अंतर के कारण सरकारी गोदामों में अनाज जमा होता जा रहा है।
FCI को कर्ज भी लेना पड़ सकता है
नकदी की कमी पूरी करने के लिए FCI को 90 दिनों तक की अवधि वाले शॉर्ट टर्म लोन लेने की सुविधा है। किसी भी समय ऐसे कर्ज की कुल सीमा ₹1 लाख करोड़ तक हो सकती है। इसके लिए निर्धारित बैंकों की सालाना ब्याज दर 5.55% से 7.4% के बीच है। इसके अलावा, FCI अब तक ₹36,700 करोड़ के बॉन्ड जारी कर चुका है, जिनका भुगतान 2028 से 2031 के बीच किया जाना है।
