न बड़े कंप्यूटर थे न सिस्टम, फिर भी JRD टाटा को दी जुबान और बना दी सबसे बड़ी आईटी कंपनी; फकीरचंद कोहली की दिलचस्प कहानी
फकीर चंद कोहली, जिन्हें भारतीय आईटी उद्योग का पितामह कहा जाता है, ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नींव रखी ...और पढ़ें

फकीर चंद कोहली, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के पहले सीईओ थे।
HighLights
फकीर चंद कोहली भारतीय आईटी उद्योग के पितामह माने जाते हैं।
उन्होंने देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS की नींव रखी।
भारत को वैश्विक सॉफ्टवेयर महाशक्ति बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
नई दिल्ली। भारत के आईटी उद्योग की दुनिया में एक खास पहचान है। TCS, इंफोसिस, विप्रो, टेक महिंद्रा से लेकर अन्य कंपनियां दुनियाभर में अपनी सेवाएं देती हैं। क्या आप जानते हैं इंडियन आईटी इंडस्ट्री को इस मुकाम तक किसने पहुंचाया, कौन है भारतीय आईटी उद्योग का पितामह, जिनकी दूरदर्शी सोच से आज देश की आईटी इंडस्ट्री, लाखों लोगों को रोजगार दे रही है। आमतौर पर जब भी आईटी इंडस्ट्री की बात होती है तो नारायण मूर्ति, अजीम प्रेमजी, नंदन नीलेकणि जैसी मशहूर शख्सियत और उनके योगदान का जिक्र होता है लेकिन भारत में आईटी इंडस्ट्री के रचनाकार रहे 'एफ सी कोहली' फकीर चंद कोहली (Faquir Chand Kohli), जिन्हें भारतीय आईटी उद्योग का पितामह कहा जाता है।
फकीर चंद कोहली, देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के पहले सीईओ थे और उन्होंने ही भारत को एक ग्लोबल सॉफ्टवेयर महाशक्ति बनाने की नींव रखी थी। उनकी सोच और मेहनत का नतीजा है कि FY26 में भारत की IT और BPM इंडस्ट्री का कुल रेवेन्यू 315.4 बिलियन डॉलर यानी करीब 28 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
पाकिस्तान में जन्म, भारत में कमाया नाम
एफ सी कोहली का जन्म 1924 में पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था, जहां उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर से ग्रेजुएशन किया। 1947 में विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा गए और क्वींस यूनिवर्सिटी व अमेरिका के प्रतिष्ठित एमआईटी (MIT) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। 1951 में उन्होंने टाटा इलेक्ट्रिक कंपनीज (अब टाटा पावर) के साथ भारत में अपने करियर की शुरुआत की।
टाटा की पावर कंपनी में नौकरी करते हुए उन्होंने बिजली ग्रिड के संचालन को बेहतर बनाने के लिए पहली बार कंप्यूटर तकनीक का इस्तेमाल किया, जो उस जमाने में भारत के लिए बहुत नई बात थी।
फिर मिला TCS के नेतृत्व का जिम्मा
50 से लेकर 70 का दशक, यह वह समय था जब भारत में औद्योगीकरण तेजी से हो रहा था। इसी कड़ी में 1968 में जे.आर.डी. टाटा ने टाटा समूह की कंपनियों को तकनीकी सेवाएं देने के लिए एक नया वेंचर शुरू करने का फैसला किया। इस काम के लिए उन्होंने एफ.सी. कोहली को चुना और यहीं TCS का सफर शुरू हुआ। एफ सी कोहली के नेतृत्व में टीसीएस की नींव रखी गई, जो आज टाटा समूह की सबसे मूल्यवान और कैश काऊ कंपनी (सबसे अधिक लाभ पहुंचाने वाली) है। एफसी कोहली की अगुवाई में TCS ने भारत से दुनिया भर में सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करने का रास्ता खोला।
दूरदर्शी सोच से बनाया सॉफ्टवेयर हब
1970 और 80 के दशक में जब भारत में आम लोगों के बीच कंप्यूटर को लेकर बहुत भय था, खासकर नौकरियां छिनने का डर, तब एफ सी कोहली ने विजन दिया था कि भारत अपनी युवा आबादी और गणितीय क्षमता के दम पर दुनिया का सॉफ्टवेयर हब बन सकता है, और उनकी यह दूरदर्शिता सही साबित हुई। यह एफसी कोहली की सोच का ही नतीजा है कि वैश्विक आईटी आउटसोर्सिंग बाजार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 17.5% है। आज भी दुनिया भर की कंपनियां अपने आईटी और सॉफ्टवेयर से जुड़े कामों के लिए सबसे ज्यादा भारत पर ही भरोसा करती हैं।
खास बात है कि अमेरिका और ब्रिटेन, भारतीय आईटी इंडस्ट्री और सर्विसेज के सबसे बड़े और प्रमुख बाजार हैं। भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा डेवलपर वर्कफोर्स है। देश में 54 लाख से ज्यादा सॉफ्टवेयर इंजीनियर मौजूद हैं।
एन. चंद्रशेखरन भी रहे शिष्य
एफ.सी. कोहली के बाद एस. रामादोराई ने टीसीएस की कमान संभाली और उसके बाद एन चंद्रशेखरन ने 1987 में एक ट्रेनी के रूप में TCS में अपने करियर की शुरुआत की थी। खास बात है कि एफ सी कोहली के नेतृत्व में काम करते हुए ही वह आगे चलकर TCS के सीईओ और आज टाटा संस के चेयरमैन के मुकाम तक पहुंचे।
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एन. चंद्रशेखरन जैसी शख्सियत, एफसी कोहली के शिष्य रहें, जबकि नारायण मूर्ति और अजीम प्रेमजी जैसे दिग्गज उन्हें उद्योग का विजनरी गुरु मानते हैं। 26 नवंबर 2020 को 96 वर्ष की आयु में फकीर चंद कोहली का निधन हो गया।
