खुशखबरी! 110 से घटकर 30% हो जाएगा टैक्स, भारत में सस्ती होंगी प्रीमियम विदेशी कारें, EU के साथ FTA के तहत छूट
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते के तहत, भारत ने यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क में भारी कटौती का प्रस्ताव दिया है, जिससे देश में प्रीमियम यूरोपीय कारें सस्ती हो जाएंगी।।

भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत, ड्यूटी में भारी कटौती का प्रस्ताव
HighLights
भारत ने यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क में कटौती का प्रस्ताव दिया।
यूरोपीय कारें भारत में सस्ती हो जाएंगी, प्रीमियम सेगमेंट को लाभ।
EU भारतीय कारों के लिए टैरिफ- फ्री एक्सपोर्ट कोटा बढ़ाएगा।
नई दिल्ली। देश में आने वाले दिनों में प्रीमियम यूरोपियन कारें (European Cars) सस्ती हो जाएंगी। दरअसल, भारत ने प्रस्तावित भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत, ड्यूटी में भारी कटौती करके यूरोपीय कार बनाने वाली कंपनियों के लिए अपने सुरक्षित पैसेंजर-व्हीकल मार्केट के दरवाज़े और ज़्यादा खोलने का प्रस्ताव दिया है। इससे Mercedes-Benz, BMW, Volkswagen जैसी यूरोपीय कंपनियों की गाड़ियां भारत में काफी सस्ती हो जाएंगी। हालांकि, सरकार ने 15,000 यूरो (करीब 13-14 लाख रुपये) से कम कीमत वाली कारों को इस छूट से पूरी तरह बाहर रखा है। वहीं दूसरी ओर, ब्रसेल्स भारतीय कार निर्माताओं को ज़्यादा लिबर कोटा के साथ ड्यूटी-फ्री एक्सपोर्ट का कहीं बड़ा मौका दे रहा है।
EU की ओर से जारी FTA की जांच के बाद सामने आई जानकारी से पता चलता है कि भारत पहले साल में EU देशों से 1,00,000 तक इंटरनल-कंबशन इंजन (ICE) और हाइब्रिड पैसेंजर कारों के इंपोर्ट की इजाज़त देगा। इन पर 30-35% ड्यूटी लगेगी और यह कोटा धीरे-धीरे बढ़कर 10वें साल तक 1,60,000 गाड़ियों तक पहुंच जाएगा। पांचवें साल से टैरिफ घटकर 10% हो जाएगा। अभी भारत पैसेंजर गाड़ियों के इंपोर्ट पर 66% से 110% तक ड्यूटी लगाता है।
एक्सपोर्ट पर EU का ऑफर
- इसके बदले में, EU पहले साल में कम ड्यूटी और एक तय कोटा के साथ भारत में बनी 2,50,000 कारों के इंपोर्ट की इजाज़त देगा, और 10वें साल तक यह संख्या बढ़कर 4,00,000 गाड़ियां हो जाएगी।
- भारतीय कारों पर यूरोपीय संघ का प्रफेंशियल ड्यूटी पहले वर्ष में 8% से घटकर पांचवें वर्ष तक शून्य हो जाएगा। वर्तमान में यूरोपीय संघ यात्री वाहनों के आयात पर 10% शुल्क लगाता है। यह यूनियन 50,000 यूरो तक की कीमत वाली भारतीय आईईसी और हाइब्रिड कारों को प्रिफेंशियल पहुंच प्रदान करेगा।
- 15,000 से 35,000 यूरो की कीमत वाली कारों के लिए, भारत का इन-कोटा टैरिफ़ पहले साल में 35% से घटकर दूसरे साल में 25%, तीसरे साल में 20%, चौथे साल में 15% और पांचवें साल से 10% हो जाएगा।
- 35,000 से 50,000 यूरो की कीमत वाली कारों के लिए, टैरिफ़ 30% से शुरू होगा और इसी तरह घटकर 10% तक आ जाएगा। भारत ने अपने मास-मार्केट ऑटोमोबाइल सेगमेंट को भी सुरक्षित रखने की कोशिश की है।
- पैसेंजर कारों के लिए इस खास व्यवस्था में 15,000 यूरो से कम कीमत वाली कारें शामिल नहीं हैं, जिससे भारत की सबसे ज़्यादा बिकने वाली गाड़ियों की कैटेगरी पर तुरंत कोई कॉम्पिटिटिव खतरा नहीं होगा।
यह समझौता प्रीमियम और ज़्यादा कीमत वाले सेगमेंट में यूरोपीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक खास रास्ता बनाता है, जहाँ यूरोपीय ब्रांड्स की पारंपरिक रूप से मज़बूत मौजूदगी रही है।
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भारत ने पूरी तरह से अलग-अलग हिस्सों में आने वाली (CKD) गाड़ियों के लिए एक अलग और खास व्यवस्था की है। इससे यूरोप की बनाने वाली कंपनियों को बढ़ावा मिल सकता है कि वे पूरी तरह से इंपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय यहीं असेंबली करें।
