JP Associates की तरह अनिल अंबानी की 5 कंपनियां जिन पर लगा 'दिवालिया' का ठप्पा, कैसे तबाह हुआ सब कुछ?
अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस ADAG की कई बड़ी कंपनियां IBC के तहत दिवालिया हो चुकी हैं, जिनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कैपिटल प्रमुख हैं।

अनिल अंबानी की कंपनियों का दिवालियापन: कर्ज और चुनौतियों ने कैसे डुबोया कारोबार
HighLights
रिलायंस कम्युनिकेशंस भारी कर्ज के कारण दिवालिया हुई।
रिलायंस कैपिटल को RBI ने CIRP में भेजा।
अनिल अंबानी ने अपनी नेटवर्थ शून्य बताई थी।
नई दिल्ली। अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस ADAG (अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप) की कई बड़ी कंपनियां भारत के इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत इनसॉल्वेंसी या बैंकरप्सी की कार्यवाही में शामिल हो गई हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसे जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) को कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में शामिल किया गया था। आइए जानते हैं कि अनिल अंबानी की कौन-कौन सी कंपनी दिवालिया हो चुकी हैं?
रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom/RCOM)
अनिल अंबानी की दिवालिया हुई कंपनियों में रिलायंस कम्युनिकेशंस और इससे जुड़ी कंपनियां जिनमें रिलायंस इन्फ्राटेल/RITL भी शामिल हैं। ये अनिल अंबानी की सबसे बड़ी कंपनियों में से थीं। कभी टेलीकॉम सेक्टर की बड़ी कंपनी रही RCom को भारी कर्ज का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह Jio जैसे दिग्गज प्लेयर्स से बढ़ता कॉम्पिटिशन रहा। यह खासकर ऑपरेशन से जुड़ी दिक्कतें की वजह से रहा। इसे एरिक्सन जैसी कंपनियों की याचिकाओं के बाद 2018-2019 के आसपास CIRP में शामिल किया गया। इन कंपनियों को कर्ज देने वालों को बहुत कम रिकवरी मिली। जो कि कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 1% ही रहा। बाद में इस प्रोसेस के जरिए एसेट्स की बिक्री की गई और कुछ लोन की रिकवरी हुई।
रिलायंस कैपिटल
यह बड़ी फाइनेंशियल सर्विस होल्डिंग कंपनी एक NBFC-CIC है। इसे डिफ़ॉल्ट और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं का सामना करना पड़ा था। RBI ने इसके बोर्ड को हटा दिया और कंपनी 2021 के आखिर में कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में चली गई। एक रिज़ॉल्यूशन प्लान जिसमें इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स शामिल थी,को मंजूरी दी गई और लागू किया गया, जिसके बाद कुछ अकाउंट्स में लगभग 37% की रिकवरी हुई। अब कंपनी इस प्रोसेस से बाहर आ गई है।
रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस
ये इस ग्रुप से जुड़ी लोन देने वाली कंपनियां थीं। NBFC सेक्टर में बड़े पैमाने पर आई मुश्किलों के बीच, इन्होंने पेमेंट में डिफ़ॉल्ट किया और इन्हें दिवालियापन/रिज़ॉल्यूशन की प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ा, जो रिलायंस कैपिटल से जुड़ी समस्याओं के कारण हुआ था। RHFL का नाम JP एसोसिएट्स के साथ-साथ 21वीं सदी के बड़े दिवालिया मामलों की लिस्ट में शामिल है।
रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग
रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग पहले पिपावाव डिफेंस से जुड़ी थी। यह कंपनी बड़ी बकाया रकम करीब ₹12,000–13,000 करोड़ का भुगतान करने में नाकाम रही। इसके खिलाफ दिवालियापन की प्रक्रिया चली और बाद में इसे खरीद लिया गया। इसमें स्वान एनर्जी जैसी कंपनियां शामिल थीं। जिसके बाद कर्ज देने वालों को बहुत कम रिकवरी मिली। जो की करीब 17% थी।
कुछ सब्सिडियरी कंपनियों, जैसे कि KM टोल रोड प्राइवेट लिमिटेड (रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत), को भी CIRP (कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस) में शामिल किया गया है।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर पर भी भारी कर्ज और कई तरह की चुनौतियों का दबाव रहा है। हालांकि, इनके ऑपरेशन चल रहे हैं।
अनिल अंबानी ने अपनी नेटवर्थ बताई थी शून्य
अनिल अंबानी को खुद भी गारंटर के तौर पर पर्सनल इनसॉल्वेंसी (व्यक्तिगत दिवालियापन) की कार्यवाही का सामना करना पड़ा है। यह खासकर RCom/RITL गारंटी से जुड़े SBI के क्लेम पर रहा है। इसमें NCLT ने मामला स्वीकार किया था, बाद में अपील की गई। इससे पहले उन्होंने चीनी लेंडर्स से जुड़े UK कोर्ट के एक मामले में अपनी नेटवर्थ लगभग शून्य बताई थी। अनिल अंबानी की नेटवर्थ 2019 में फोर्ब्स के मुताबिक 1.7 बिलियन डॉलर आज के हिसाब से करीब 16,244 करोड़ रुपये थी।
ये मामले मुख्य रूप से ज़्यादा कर्ज (हाई लेवरेज), प्रोजेक्ट में देरी, सेक्टर में उथल-पुथल टेलीकॉम में कॉम्पिटिशन, NBFC में लिक्विडिटी की समस्या और उसके बाद पेमेंट में चूक या कहें कि डिफॉल्ट की वजह से हुए हैं।
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