कर्ज में रूस को बेचने पड़ी थी भारत की रिफाइनरी, अब अमेरिका में बनाएंगे सबसे बड़ा स्टील प्लांट, रुइया ब्रदर्स की दिलचस्प कहानी?
एस्सार ग्रुप, जिसने कभी भारी कर्ज के कारण अपनी तेल कंपनी रूसी कंपनी को बेची थी, अब अमेरिका में एक ...और पढ़ें

रुइया ब्रादर्स, शशि और रवि रुइया।
HighLights
एस्सार ग्रुप अमेरिका में विशाल आयोवा स्टील मिल बना रहा है।
यह मिनेसोटा की लौह अयस्क खदान से सीधे जुड़ा होगा।
रुइया ब्रदर्स ने कर्ज चुकाकर वैश्विक विस्तार पर ध्यान दिया।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अमेरिका में भारत के एस्सार ग्रुप के सहयोग से एक बड़े नए स्टील प्रोजेक्ट की घोषणा की, तो दुनिया की नजर भारत के मजबूत औद्योगिक परिवारों में से एक पर गड़ गईं। एस्सार के सहयोग से 'मेसाबी मेटालिक्स' के जरिए विकसित होने वाली आयोवा स्टील मिल जिसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी मिलों में से एक बताया जा रहा है, को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह अपने पहले चरण में सालाना 7.5 मिलियन टन स्टील का उत्पादन करेगी और बाद में इसे बढ़ाकर 10 मिलियन टन तक ले जाया जाएगा।
मिनेसोटा में एस्सार के आयरन ओर (लौह अयस्क) ऑपरेशन्स से सीधे जुड़े इस बड़े अमेरिकी विस्तार ने उस ग्रुप के लिए एक अहम मोड़ ला दिया है, जिसकी शुरुआत पांच दशक से भी पहले दक्षिण भारत में एक इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्ट्रैक्ट के साथ हुई थी।
रुइया ब्रदर्स: शून्य से एस्सार का निर्माण
एस्सार की कहानी 1969 में शुरू हुई जब दो भाइयों, शशि रुइया और रवि रुइया ने कंपनी की स्थापना की। उस समय जब भारत में बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर विदेशी कंपनियों का दबदबा था, एस्सार ने चेन्नई पोर्ट पर आउटर ब्रेकवाटर बनाने का ₹2.5 करोड़ का छोटा सा कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया। कंपनी का नाम दोनों भाइयों के नाम के शुरुआती अक्षरों 'S' और 'R' को मिलाकर रखा गया था, जिनका उच्चारण 'एस्सार' (Essar) होता है।
1943 में जन्मे बड़े भाई शशि रुइया ने 1965 में अपने पिता नंद किशोर रुइया के साथ अपना करियर शुरू किया, जबकि पेशे से इंजीनियर रवि रुइया बिजनेस को बढ़ाने के लिए उनके साथ जुड़ गए। तकनीकी विशेषज्ञता और रणनीतिक सोच को मिलाकर, दोनों भाई तेजी से पोर्ट निर्माण से आगे बढ़े।
1976: अपना पहला टैंकर खरीदकर शिपिंग बिजनेस में कदम रखा।
1980 और 1990 के दशक: स्टील (गुजरात के हजीरा में प्लांट बनाना), ऑयल रिफाइनिंग (वडिनार रिफाइनरी), बिजली उत्पादन, पोर्ट और टेलीकम्युनिकेशन के क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया।
टेलीकॉम और सर्विसेज: वोडाफोन एस्सार के जरिए भारत में टेलीकॉम सेक्टर के तेजी से बढ़ते दौर में शुरुआती प्राइवेट प्लेयर बने और एजिस (Aegis) को एक ग्लोबल BPO पावरहाउस बनाया।
वोडाफोन से बाहर निकलना (2011): वोडाफोन एस्सार में अपनी 33% हिस्सेदारी को 5.46 अरब डॉलर में बेचा।
एस्सार ऑयल की बिक्री (2017): एस्सार ऑयल की 98.26% हिस्सेदारी रूस की रोज़नेफ़्ट (Rosneft) और ट्रैफ़िगुरा-UCP (Trafigura-UCP) के कंसोर्टियम को 12.9 अरब डॉलर में बेची। इसमें 20 मिलियन टन क्षमता वाली वडिनार रिफाइनरी, पोर्ट, बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर और 3,500 फ्यूल स्टेशन शामिल थे।
हालांकि, स्टील, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में तेज़ी से और भारी निवेश वाले विस्तार के कारण उन पर भारी कर्ज़ हो गया। भारत में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (दिवाला कानून) लागू होने के बाद, एस्सार स्टील दिवालियापन की प्रक्रिया में चली गई। रुइया परिवार ने 2018 में लेनदारों (creditors) के दावों को निपटाने के लिए ₹54,389 करोड़ का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उसे ठुकरा दिया गया और आखिरकार आर्सेलर-मित्तल (ArcelorMittal) ने इस एसेट को खरीद लिया।
इसके बाद ग्रुप ने तेज़ी से कर्ज़ कम करने (deleveraging) पर ध्यान दिया और एसेट्स बेचकर मिली रकम से 2019 तक लगभग ₹1.4 लाख करोड़ का कर्ज़ चुकाया।
अमेरिका में विस्तार: मिनेसोटा माइनिंग को आयोवा स्टील से जोड़ना
एस्सार का नया अमेरिकी वेंचर कई सालों के इंटरनेशनल निवेश के आधार पर खड़ा किया गया है। मेसाबी मेटालिक्स (Mesabi Metallics) के जरिए, ग्रुप ने मिनेसोटा में आयरन ओर माइन और पेलेट प्लांट प्रोजेक्ट में 1.8 अरब डॉलर से ज़्यादा का निवेश किया है। सितंबर 2026 में, मेसाबी की मिनेसोटा खदान में आधिकारिक तौर पर काम शुरू हुआ, यह 50 से ज़्यादा सालों में अमेरिका में शुरू होने वाली पहली नई आयरन ओर खदान थी। डायरेक्ट-रिडक्शन-ग्रेड आयरन ओर पेलेट्स का 7 मिलियन टन उत्पादन करने के लिए डिज़ाइन की गई मिनेसोटा खदान अब सीधे आयोवा में प्रस्तावित स्टील बनाने वाले प्लांट को सप्लाई करती है, जिससे अमेरिका में पूरी तरह से इंटीग्रेटेड घरेलू स्टील इकोसिस्टम बनता है।
अगली पीढ़ी का नेतृत्व और विरासत
यह वैश्विक पहल ऐसे समय में हो रही है जब समूह में पीढ़ीगत बदलाव का दौर चल रहा है। सह-संस्थापक शशि रुइया का 25 नवंबर, 2024 को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे भारत में उदारीकरण के बाद के दौर में औद्योगिक विकास की नई राह दिखाने वाली विरासत छोड़ गए हैं।
आज, रवि रुइया परिवार की अगली पीढ़ी के साथ मिलकर वैश्विक रणनीति का मार्गदर्शन कर रहे हैं। इस अगली पीढ़ी में शशि के बेटे प्रशांत रुइया और रवि के बेटे रेवंत रुइया शामिल हैं। रेवंत रुइया अभी मेसाबी मेटालिक्स के एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन हैं और समूह की अमेरिकी विस्तार रणनीति को लागू करने में उनकी अहम भूमिका रही है।
