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अब छोटे कारोबारी भी विदेशों में बेच सकेंगे माल, DGFT ने ₹3 लाख से कम के सामानों के लिए बनाया नया नियम!

Published: Wed, 16 Sep 2026 08:38 PM (IST)

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने छोटे कारोबारियों के लिए निर्यात नियमों में ढील दी है। अब ₹3 लाख तक के ...और पढ़ें

छोटे कारोबारियों के लिए DGFT का नया नियम

छोटे कारोबारियों के लिए DGFT का नया नियम

HighLights

  1. DGFT ने छोटे कारोबारियों के लिए निर्यात नियम आसान किए।

  2. ₹3 लाख तक के एक्सपोर्ट पर RCMC की अनिवार्यता समाप्त।

  3. MSME और ई-कॉमर्स निर्यातकों को मिलेगा सीधा लाभ।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने बुधवार को छोटे कारोबारियों के लिए निर्यात नियमों में ढील देते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। DGFT ने ऐसे एक्सपोर्ट शिपमेंट के लिए रजिस्ट्रेशन-कम-मेंबरशिप सर्टिफिकेट (RCMC) की अनिवार्यता समाप्त कर दी है, जिनका मूल्य ₹3 लाख तक है और जहां सामान्य तौर पर यह प्रमाणपत्र आवश्यक होता है।

DGFT ने इस छूट को लागू करने के लिए विदेशी व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) 2023 में संशोधन किया है। हालांकि, ₹3 लाख से अधिक मूल्य के निर्यात शिपमेंट के लिए जहां RCMC या रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की आवश्यकता है, वहां मौजूदा नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।

छोटे व्यापारियों को मिलेगी निर्यात में मदद

सरकार ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), कारीगरों, छोटे कारोबारियों और पहली बार या कभी-कभार निर्यात करने वाले व्यवसायों के लिए कागजी प्रक्रियाओं को कम करना है। आमतौर पर इंपोर्टर्स को फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के तहत आवश्यक होने पर संबंधित एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EPC) या कमोडिटी बोर्ड से RCMC अथवा रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करना पड़ता है। इसके लिए इंपोर्टर्स को उपयुक्त संस्था की पहचान करनी होती है, दस्तावेज जमा करने होते हैं और निर्यात से पहले पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

नए नियमों के तहत पात्र कारोबारी अब सर्टिफिकेट प्राप्त किए बिना छोटे मूल्य के एक्सपोर्ट शिपमेंट भेज सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे छोटे व्यवसायों को विदेशी बाजारों का परीक्षण करने और बड़े ऑर्डर लेने से पहले अपना निर्यात रिकॉर्ड बनाने में आसानी होगी।

छोटे मूल्य के शिपमेंट का निर्यात दस्तावेजों में बड़ा हिस्सा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 तक के पिछले पांच वर्षों में कम मूल्य वाले शिपमेंट्स का निर्यात दस्तावेजों में बड़ा हिस्सा रहा है, जबकि भारत के कुल माल निर्यात मूल्य में उनकी हिस्सेदारी काफी कम रही है।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 3,000 डॉलर तक मूल्य वाले शिपमेंट्स इस अवधि में कुल शिपिंग बिलों का 43% रहे, लेकिन भारत के कुल मर्चेंडाइज निर्यात मूल्य में उनकी हिस्सेदारी केवल 0.86 प्रतिशत थी। सरकार का अनुमान है कि यह छूट बड़ी संख्या में छोटे निर्यात लेनदेन को कवर करेगी, जबकि कुल माल निर्यात मूल्य पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा।

ई-कॉमर्स एक्सपोर्टर्स को भी मिलेगा फायदा

यह बदलाव उन व्यवसायों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है जो ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से विदेशों में उत्पाद बेचते हैं या डाक एवं कूरियर सेवाओं के जरिए एक्सपोर्ट करते हैं। इन माध्यमों ने छोटे कारोबारियों, कारीगरों और व्यक्तिगत उद्यमियों के लिए विदेशी ग्राहकों तक पहुंचना आसान बनाया है। नई छूट उन्हें कम मूल्य के शिपमेंट से शुरुआत करने और अनुपालन लागत घटाने का अवसर देगी।

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सरकार ने कहा कि जो व्यवसाय आगे चलकर 3 लाख रुपये की सीमा से अधिक निर्यात करेंगे, वे बाद में संबंधित एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल या कमोडिटी बोर्ड की सदस्यता प्राप्त कर सकेंगे और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं, बाजार पहुंच सहायता तथा अन्य संस्थागत सहयोग का लाभ उठा सकेंगे।

हालांकि, ₹3 लाख से अधिक मूल्य के निर्यात शिपमेंट पर RCMC की अनिवार्यता में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विदेशी व्यापार नीति के तहत जहां यह प्रमाणपत्र आवश्यक है, वहां यह नियम पहले की तरह लागू रहेगा।