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दोहरे संकट में घिरीं डेयरी कंपनियां, पहले मांग घटी, अब उत्पादन में कमी ने चुनौती बढ़ाई; SMP आयात की नौबत...

एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व स्तर पर डेयरी फीड (पशु चारे) की 1.32 फीसद की कमी है। जबकि घरेलू स्तर पर यह आंकड़ा और भी कम है। पशु चारे में शामिल भूसे और घास की महंगाई भी बढ़ी है। (जागरण-फोटो)

By Jagran NewsEdited By: Ashisha Singh RajputPublished: Mon, 30 Jan 2023 08:46 PM (IST)Updated: Mon, 30 Jan 2023 08:46 PM (IST)
मूल्य बढ़ाने पर भी नहीं हो रहा खरीद में सुधार, एसएमपी आयात की नौबत

नई दिल्ली, सुरेंद्र प्रसाद सिंह। लंपी जैसे संक्रामक रोग से प्रकोप से दुधारू पशुओं में घटे उत्पादन का असर बाजार में दिखने लगा है। देश की संगठित डेयरी कंपनियों के मूल्य बढ़ाने के बावजूद उनकी खरीद नहीं बढ़ पा रही है। कोरोना महामारी के दौरान असंगठित और निजी क्षेत्रों में दूध की मांग घटने से दूध उत्पादकों को भारी घाटा उठाना पड़ा था, जिसके चलते दुधारू पशुओं की संख्या में कटौती की गई।

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इन वजहों से घटा घरेलू बाजार में कंपनियों के पास (एसएमपी) का स्टॉक

इन्हीं वजहों से घरेलू बाजार में कंपनियों के पास स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) का स्टॉक घट गया है। घरेलू बाजार में दूध की महंगाई पर काबू पाने के लिए आयात की नौबत आ सकती है। इससे डेयरी कंपनियां दोहरे संकट में घिर गई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व स्तर पर डेयरी फीड (पशु चारे) की 1.32 फीसद की कमी है। जबकि घरेलू स्तर पर यह आंकड़ा और भी कम है। पशु चारे में शामिल भूसे और घास की महंगाई भी बढ़ी है।

खल व चूनी के भाव में कई गुना की हुई वृद्धि

पशुओं के पौष्टिक तत्वों में शुमार दलहनी व तिलहनी फसलों से तैयार खल (खली) व चूनी के भाव में कई गुना की वृद्धि हुई है, जिससे दूध की उत्पादन लागत में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके विपरीत कोरोना काल में दूध की घटी मांग के चलते कीमतें लागत से नीचे पहुंच गई थी। इससे बचने के लिए पशु पालकों ने पशुओं की संख्या में कटौती कर ली थी, जिसका नतीजा अब सामने आ रहा है।लंपी संक्रामक रोग से उत्तरी और पश्चिमी राज्य बुरी तरह प्रभावित हुए थे, जिसमें हजारों की संख्या में पशुओं की मौत हुई और लाखों पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता में कमी आई।

अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में की वृद्धि

इसी वजह से देश की प्रमुख डेयरी कंपनियां अमूल और मदर डेयरी ने मात्र सालभर में अपने ब्रांड वाले दूध की कीमतों में 6 से नौ रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। उनके दूध कलेक्शन में कमी आने लगी थी, जिससे उन्होंने दाम बढ़ाकर खरीदने की कोशिश शुरू की है। लेकिन बहुत फायदा नहीं हुआ है। कमोबेश यही हाल देश की विभिन्न डेयरी कंपनियों और मिल्क कोआपरेटिव सोसाइटियों का रहा है। कंपनियों के पास का पुराना एसएमपी का स्टॉक भी खाली हो रहा है। ब्रांडेड कंपनियों के देसी घी की भी बाजार में उपलब्धता कम है।

पशुपालकों के पास दुधारू पशुओं की संख्या कम हुई

जानी मानी डेयरी कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक प्रमुख डेयरी कंपनियां गाय का दूध 37 से 38 रुपये प्रति लीटर और भैंस का 54 से 55 रुपये प्रति लीटर खरीद रही हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त दूध नहीं मिल रहा है। दरअसल पशुपालकों के पास दुधारू पशुओं की संख्या कम हुई है। दुधारू पशुओं की उत्पादन क्षमता में भी कमी आई है। दक्षिणी राज्यों में कंपनियों की दूध की खरीद में 25 फीसद तक की कमी दर्ज की गई है। अप्रैल के बाद दूध खरीद में और कमी आ सकती है, जिसके चलते उपभोक्ताओं को और महंगा दूध लेना पड़ सकता है।.

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