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कच्चे तेल की कीमतों में मचा हाहाकार! मिडिल ईस्ट तनाव से लगातार दूसरे दिन उछले दाम; भारत पर क्या होगा असर?

Published: Tue, 29 Sep 2026 08:45 AM (IST)

Crude oil price surge: मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं के कारण कच्चे ...और पढ़ें

कच्चे तेल की कीमतों में मचा हाहाकार!

कच्चे तेल की कीमतों में मचा हाहाकार! 

HighLights

  1. मध्य पूर्व तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि।

  2. ब्रेंट क्रूड $106.91, US WTI $93.32 प्रति बैरल पहुंचा।

  3. भारत का आयात बिल बढ़ेगा, ईंधन कीमतों पर दबाव संभव।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर से उबाल आना शुरू हो गया है। मध्य पूर्व (Middle East) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और तेल की सप्लाई बाधित होने की चिंताओं के कारण लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

कितने बढ़े दाम?

बता दें कि मंगलवार को लगातार दूसरे दिन तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह यह थी कि उस इलाके से कच्चे तेल के एक्सपोर्ट में सुधार के संकेतों के बावजूद, अमेरिका-ईरान के बीच टकराव की वजह से मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावट की चिंता बनी रही। दामों की बात करें तो 0002 GMT तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 63 सेंट या 1.51% बढ़कर $106.91 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 72 सेंट या 0.8% बढ़कर $93.32 पर पहुंच गया।

कितना बढ़ा क्रूड ऑयल का निर्यात

डेटा प्रोवाइडर 'केप्लर' (Kpler) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को पता चला कि सितंबर में मध्य पूर्व के प्रमुख उत्पादक देशों से कच्चे तेल का निर्यात बढ़कर 12.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया। यह फरवरी के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है और इसमें सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से बढ़ी हुई शिपमेंट का योगदान रहा।

सप्लाई पर मंडराया खतरा

मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे अहम तेल उत्पादक और निर्यातक क्षेत्र है। यहां किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या अस्थिरता से लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख व्यापारिक समुद्री रास्तों से तेल की आवाजाही पर सीधा असर पड़ता है। सप्लाई रुकने या बाधित होने की इसी आशंका (Supply Concern) ने बाजार में 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) का माहौल बना दिया है।

भारत पर इसका क्या होगा असर?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों का बढ़ना भारत के लिए कभी भी अच्छी खबर नहीं होती। क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल (Import Bill) बढ़ता है, जिससे व्यापार घाटे (Trade Deficit) पर नकारात्मक असर पड़ता है।

हालांकि फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन अगर कच्चे तेल में तेजी का यह दौर लंबा खिंचता है, तो सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के रिफाइनिंग मार्जिन पर भारी दबाव पड़ेगा। ऐसे में भविष्य में ईंधन के दाम घटने की उम्मीदें धूमिल हो जाएंगी और कीमतें बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

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