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कच्चे तेल की कीमतों में लगी 'आग', कीमत पहुंची 117 डॉलर के पार; सोमवार को शेयर बाजार में मचेगा हाहाकार!

Published: Fri, 23 Oct 2026 10:49 PM (GMT+05:30)

अमेरिका-ईरान तनाव और आपूर्ति चिंताओं के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई ...और पढ़ें

ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा।

ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा।

HighLights

  1. ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा।

  2. अमेरिका-ईरान तनाव और आपूर्ति चिंताएं प्रमुख कारण।

  3. भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध बढ़ने की आशंकाओं ने तेल बाजार में चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार 23 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 117 डॉलर प्रति बैरल (Brent Crude Oil Price) के पार पहुंच गया। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा भी गहरा गया है। कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी का असर आने वाले कारोबारी सत्र में शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में आए इस उछाल का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) पर देखने को मिल सकता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बाजार दबाव में आता है, जिसके चलते बिकावली बढ़ती है।

120 डॉलर के पार जा सकती है क्रूड की कीमतें

शुक्रवार को कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत में 3.5 फीसदी तक की तेजी आई और इसका भाव बढ़कर 117.14 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। अप्रैल के बाद यह पहला मौका है, जब तेल की कीमतें इस स्तर पर पहुंची हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज होने की आशंका और दुनिया में तेल के भंडार घटने की चिंताओं ने कीमतों को सहारा दिया है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ सकती हैं। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी।

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ता तनाव है। दुनिया के तेल व्यापार के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है। ईरान ने इस सप्ताह यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर हमले तेज किए हैं।

ईरान के सरकारी टेलीविजन के मुताबिक, गुरुवार को सात तेल टैंकर या तो हमलों की चपेट में आए या समुद्री बारूदी सुरंगों से प्रभावित हुए। इससे तेल की आपूर्ति बाधित होने का डर बढ़ गया है।

सोमवार को शेयर बाजार पर दिख सकता है असर

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, बाजार की वास्तविक दिशा अन्य वैश्विक संकेतों और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर भी निर्भर करेगी।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे रुपये पर दबाव, महंगाई में तेजी और कंपनियों की लागत बढ़ने का खतरा रहता है।

खासतौर पर विमानन, पेंट, टायर और तेल पर निर्भर दूसरे उद्योगों की कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। वहीं, तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है।

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