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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 19, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

क्रिसिल के एमडी व सीईओ अमीश मेहता ने बताया कैसे रोजगार के सवाल का निकलेगा समाधान

By Jagran NewsEdited By: Gaurav Kumar
Published: Thu, 19 Oct 2023 06:50 PM (IST)

चुनाव शुरू होते ही रोजगार को लेकर कई सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसे में देश की प्रमुख आर्थिक शोध ...और पढ़ें

भारत के पास आर्थिक विकास दर की गति तेज करने के तमाम अवसर हैं।
भारत के पास आर्थिक विकास दर की गति तेज करने के तमाम अवसर हैं।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली: जब जब देश में चुनाव का मौसम शुरु होता है रोजगार को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगते हैं। ऐसे में देश की प्रमुख आर्थिक शोध एजेंसी क्रिसिल के एमडी व सीईओ अमीश मेहता का कहना है कि भारतीय इकोनमी जिस रफ्तार से बढ़ रही है और जिस तरह से इकोनमी से जुड़े सभी क्षेत्रों जैसे कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग, निर्यात, सर्विस और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की दिशा दिख रही है उससे बड़ी संख्या में रोजगार सृजन के अवसर बन रहे हैं।

आर्थिक विकास दर की गति तेज करने के तमाम अवसर

क्रिसिल वैश्विक रेटिंग व शोध एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स की सहायक कंपनी है और भारत में कारोबार करने को इच्छुक सैकड़ों वैश्विक कंपनियों को यह कई तरह की शोध व प्लानिंग मुहैया कराती है। मेहता का कहना है कि एक देश के तौर पर भारत अभी वैश्विक मंच पर जहां है वहां आर्थिक विकास दर की गति तेज करने के तमाम अवसर हैं जिसका प्रभाव रोजगार पर भी दिखेगा।

रोजगार के ज्यादातर अवसर कृषि सेक्टर में

दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में अमीश मेहता ने बताया कि क्यों वह रोजगार के अवसरों को लेकर सकारात्मक हैं। मेहता ने बताया कि भारत में रोजगार के ज्यादातर अवसर अभी भी कृषि सेक्टर पर काफी निर्भर है और जब यह क्षेत्र बेहतर करेगा तो निश्चित तौर पर यहां ज्यादा रोजगार के अवसर मिलेंगे।

किसानों को उनके उत्पादों को बेहतर कीमत दिलाने, कृषि सेक्टर से जुड़े ढांचागत सुविधाओं को बेहतर करने का सकारात्मक असर भी यहां दिखेगा।

कृषि के बाद मैन्यूफैक्चरिंग में रोजगार के अवसर

उनकी उम्मीद का दूसरा सेक्टर मैन्यूफैक्चरिंग है जिसमें सरकार की कई नीतियों का भी असर दिखेगा और वैश्विक स्तर पर बने माहौल का भी असर होगा। मेहता के मुताबिक, “मेक इन इंडिया, पीएलआई स्कीम, चीन प्लस वन, वैश्विक सप्लाई चेन में भारत को शामिल करने जैसे कई सारे कदम एक साथ बढ़ाए जा रहे हैं।

इससे देश की जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग की हिस्सेदारी तो बढ़ेगी ही साथ ही बड़े पैमाने पर फैक्टि्रयां, मेगा-फैक्टि्रयां भारत में लगाई जाएंगी। यहां भी रोजगार की काफी नई संभावनाएं बनती मुझे दिख रही हैं।

मैन्यूफैक्चरिंग के बाद सर्विस सेक्टर में रोजगार के अवसर

मेहता अगला उदाहरण सर्विस सेक्टर का देते हैं जहां हाल के दशकों में सबसे ज्यादा रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि

पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा ग्रेजुएट भारत में है। सबसे ज्यादा प्रतिभा यहां पर है। हमारी शिक्षा व्यवस्था, प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने की सरकार की योजना की वजह से हम सर्विस सेक्टर में दुनिया भर में बेहतरीन सेवा देने में सक्षम हैं। मैं स्वयं दुनिया भर की वैश्विक कंपनियों से बात करता हूं जिसके आधार पर कह सकता हूं कि अगर कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित करना चाहती है तो उसके लिए पहला विकल्प भारत ही है। किसी भी कंपनी को अगर आरएंडडी केंद्र स्थापित करना है या इंजीनयरिंग केंद्र खोलना है तो भारत के बारे में ही सोच रहा है। इसी तरह से सूचना प्रौद्योगिक के बाद आर्टिफिशएल इंटेलीजेंस, कंप्यूटिंग जैसे प्रौद्योगिकी में भी भारत में काफी प्रशिक्षित प्रतिभाएं हैं जिनकी दुनिया भर में मांग होगी।

रोजगार देने में अगला स्त्रोत ढांचागत क्षेत्र साबित होगा। मेहता का कहना है कि भारत के बड़े पैमाने पर मेट्रो, सड़कों, पुलों, हाइवे, रेलवे नेटवर्क, बंदरगाहों, एयरपोर्ट का निर्माण हो रहा है।

यहां भी रोजगार के अवसर लगातार बनते रहेंगे क्योंकि भारत में इन पर काम अभी शुरू ही हुआ है। अंत में क्रिसिल सीईओ का आकलन यह है कि अगर रोजगार सृजन के उक्त माध्यम सही तरीके से काम करते रहे तो लंबी अवधि में भारत की आर्थिक विकास दर 7.5 फीसद से आठ फीसद तक जा सकती है।