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Fossil fuels की होगी छुट्टी? COP31 में भारत के बड़े जक्लाइमेट चेंज प्लान, कचरा प्रबंधन की तैयारी

Published: Tue, 03 Nov 2026 09:28 PM (IST)

तुर्किए में होने वाली COP31 में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 35% ...और पढ़ें

तुर्किए में शुरू हो रही कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज

तुर्किए में शुरू हो रही कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज

HighLights

  1. COP31 में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने पर होगी चर्चा।

  2. 2035 तक कुल ऊर्जा में बिजली की हिस्सेदारी 35% का लक्ष्य।

  3. भारत पेरिस समझौते, ग्लोबल साउथ के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| जलवायु परिर्वतन की बढ़ती चुनौतियों के बीच ग्लोबल लेवल पर फिर से जीवाश्म ईंधन (Fossil fuels) से निर्भरता घटाने को लेकर चर्चा तेज हुई है। इस कड़ी में 9 नवंबर से तुर्किए में शुरू हो रही कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP31) के एजेंडे में कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी को 35% तक बढ़ाने के मुद्दे को प्रमुखता से शामिल किया है। जिसे 2035 तक हासिल करने का लक्ष्य भी रखा गया है। हालांकि मौजूदा समय में दुनिया में कुछ ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 20% ही है। ग्लोबल पर यह पहल तब की गई है, जब रिन्यूएबल एनर्जी के जरिए बिजली का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। भारत में मौजूदा समय में इसकी क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।

पर्यावरण मंत्री ने बताया प्लान

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने काप-31 से जुड़ी जानकारी देते हुए बताया कि COP के दौरान इसके अतिरिक्त एजेंडे में जिन विषयों को शामिल किया है, उनमें कचरा प्रबंधन के साथ ही शहरों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाने जैसे मुद्दे शामिल किए गए है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि भारत इस दौरान पेरिस समझौते के अमल के मुद्दे को प्रमुखता से दुनिया के सामने रखेगा। साथ ही विकसित देशों पर इस बात का दबाव बनाएगा, कि वह अपने उन वादों को पूरा करें, जिसके तहत विकासशील देशों को वित्तीय व तकनीकी सहायता मुहैया करानी थी। यह सम्मेलन 20 नवंबर तक चलेगा।

ग्लोबल साउथ और हिमालयन क्षेत्र के लिए प्लान

केंद्रीय मंत्री यादव भूपेंद्र यादव ने एक अलग सवाल के जवाब में बताया कि पहले की तरह भारत इस बार भी ग्लोबल साउथ की आवाज को प्रमुखता से उठाएगा। इसके साथ ही हिमालयन क्षेत्र के संरक्षण के मुद्दे को भी वह प्रमुखता से रखेगा। साथ ही आपदा से बुरी तरह से प्रभावित नेपाल को वैश्विक स्तर पर और अधिक मदद दिलाने की बात भी रखेगा।

सम्मेलन के दौरान भारत अपनी रिन्यूएबल एनर्जी सहित खराब भूमियों के संरक्षण से जुडी उन उपलब्धियों को भी रखेगा, जिसे उसने तय समय से पहले ही हासिल किया है।

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