नई दिल्ली, सुरेंद्र प्रसाद सिंह। ई-कामर्स कंपनियों की कार्यप्रणाली पर उठने वाले सवालों और बढ़ती शिकायतों को लेकर सरकार ने चेतावनी दी है। आनलाइन कारोबार करने वाली इन कंपनियों के कामकाज के तौर-तरीके को संदिग्ध करार देते हुए उन्हें सुधरने का अल्टीमेटम दिया गया है। उपभोक्ता मंत्रालय ने ई-कामर्स कंपनियों और उद्योग चैंबर्स के साथ इससे संबद्ध सभी तरह के पक्षकारों की एक संयुक्त बैठक बुलाई थी, जिसमें उपभोक्ताओं के साथ होने वाली ठगी और आनलाइन कारोबार की खामियों पर चर्चा हुई। बैठक में ई-कामर्स से जुड़े कानूनों को सख्त बनाने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में यह भी तय हुआ कि अगले एक महीने के भीतर ई-कामर्स कारोबार को सुचारू रुप से चलाने के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसी के साथ उपभोक्ता कानून में इस प्रावधान को और सख्त किया जाएगा, ताकि उपभोक्ता हितों के साथ कोई गड़बड़ी नहीं की जा सके। उपभोक्ता सचिव रोहित कुमार सिंह ने बताया कि नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (एनसीएच) में दर्ज कराई जा रही शिकायतों में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी ई-कामर्स कंपनियों के खिलाफ होती हैं। उनका मंत्रालय इन शिकायतों की गहन समीक्षा के बाद संबंधित पक्षकारों से विचार-विमर्श कर उसमें सुधार करने की प्रक्रिया अपना रहा है। इसी के तहत यह बैठक बुलाई गई थी।

ई-कामर्स कंपनियों से सख्त लहजे में कहा गया कि वे अपनी कारोबारी साइटों पर दी जाने वाले रिव्यू में पारदर्शिता बरतें। ताकि रिव्यू लिखने वालों को चिन्हित किया जा सके। फिलहाल ज्यादातर साइटों पर यह उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाल होते हैं। शुक्रवार को हुई बैठक में कुल 38 कंपनियों ने हिस्सा लिया, जिसमें फ्लिपकार्ट, अमेजॉन, टाटा संस और रिलायंस रिटेल समेत कई कंपनियां प्रमुख हैं। इसके अलावा कई उपभोक्ता मंच, लॉ यूनिवर्सिटी, वकील, फिक्की, सीआईआई और कंज्यूमर राइट्स एक्टिविस्ट संगठनों ने हिस्सा लिया।

उपभोक्ताओं की प्रमुख समस्याएं

उपभोक्ताओं की प्रमुख समस्याओं में आनलाइन आर्डर से टूटा सामान मिलना, रिफंड न मिलना या इसमें देरी होना, वापसी में हीलाहवाली, गुणवत्ता न होना, जिम्मेदारी का निर्वाह न करना है। कंपनियां इन समस्याओं को सुलझाने के बजाए पल्ला छुड़ाने में जुटी रहती है। इनके खिलाफ हर महीने हजारों की संख्या में शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, जिनका समाधान कंपनियों की ओर से नहीं हो रहा है।

यूरोपीय संघ की कार्यवाही की भी जिक्र

बैठक में यूरोपीय संघ की उस कार्यवाही का जिक्र किया गया, जिसमें यूरोपीय कमीशन ने वहां की आनलाइन कंज्यूमर रिव्यू का परीक्षण किया गया। इसमें 55 प्रतिशत वेबसाइटों की ओर से कारोबारी परंपरा और नियमों की अवहेलना सामने आई थी। 223 वेबसाइटों में से 144 को चेक किया गया, जिसमें से ज्यादातर रिव्यू फर्जी पाए गए।

Edited By: Sarveshwar Pathak